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Post Office Deposit Scheme

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इन दिनों महंगाई बढ़ती जा रही है। ऐसे में सैलरीड और मीडियम क्लास के लिए बड़े निवेश कभी आसान नहीं होते हैं। इन हालात में छोटी रकम के साथ निवेश करना एक अच्छा ऑप्शन हो सकते हैं। पोस्ट ऑफिस की रिकरिंग डिपॉजिट यानी आरडी स्कीम एक बेहतर ऑप्शन हो सकती है। इसे आवर्ती जमा के नाम से भी जाना जाता है। आरडी स्कीम (RD Scheme) की खास बात यह है कि इसमें आपको हर महीने निवेश करते हैं। इसे पोस्ट ऑफिस आरडी अकाउंट (Post Office Recurring Deposit Account) भी कहा जाता है। इसके जरिये आप हर महीने 10,000 रुपये यानी रोज 333 रुपये के निवेश के साथ 10 साल मे एक बड़ा फंड तैयार कर सकते हैं। पोस्ट ऑफिस की आरडी में 10 साल से ज्यादा उम्र का कोई भी बच्चा या वयस्क खाता खुलवा सकता है। इस अकाउंट में सिर्फ 100 रुपये के छोटे से अमाउंट से निवेश शुरू कर सकते हैं। यह योजना सरकार की गारंटी योजना के साथ आती है। अधिकतम निवेश की कोई लिमिट नहीं है आप इसमें आप 10 रुपये के मल्टीपल में कितना भी पैसा डाल सकते हैं।  फिलहाल आरडी स्कीम पर सालाना 5.8 फीसदी ब्याज मिल रहा है, यह दर जुलाई, 2022 से लागू है। केंद्र सरकार अपनी सभी छोटी बचत योजनाओं की

दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँ : अकबर इलाहाबादी

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दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार1 नहीं हूँ बाज़ार से गुज़रा हूँ, ख़रीददार नहीं हूँ ज़िन्दा हूँ मगर ज़ीस्त2 की लज़्ज़त3 नहीं बाक़ी हर चंद कि हूँ होश में, होशियार नहीं हूँ इस ख़ाना-ए-हस्त4 से गुज़र जाऊँगा बेलौस5 साया हूँ फ़क़्त6, नक़्श7 बेदीवार नहीं हूँ अफ़सुर्दा8 हूँ इबारत9 से, दवा की नहीं हाजित10 गम़ का मुझे ये जो’फ़11 है, बीमार नहीं हूँ वो गुल12 हूँ ख़िज़ां13 ने जिसे बरबाद किया है उलझूँ किसी दामन से मैं वो ख़ार14 नहीं हूँ यारब मुझे महफ़ूज़15 रख उस बुत के सितम से मैं उस की इनायत16 का तलबगार17 नहीं हूँ अफ़सुर्दगी-ओ-जौफ़18 की कुछ हद नहीं “अकबर” क़ाफ़िर19 के मुक़ाबिल में भी दींदार20 नहीं हूँ शब्दार्थ: 1. तलबगार= इच्छुक, चाहने वाला; 2. ज़ीस्त= जीवन; 3. लज़्ज़त= स्वाद; 4. ख़ाना-ए-हस्त= अस्तित्व का घर; 5. बेलौस= लांछन के बिना; 6. फ़क़्त= केवल; 7. नक़्श= चिन्ह, चित्र; 8. अफ़सुर्दा= निराश; 9. इबारत= शब्द, लेख; 10. हाजित(हाजत)= आवश्यकता; 11. जो’फ़(ज़ौफ़)= कमजोरी, क्षीणता; 12. गुल= फूल; 13. ख़िज़ां= पतझड़; 14. ख़ार= कांटा; 15. महफ़ूज़= सुरक्षित; 16. इनायत= कृपा; 17. तलबगार= इच्छुक; 18. अफ़सुर्दगी

NATIONAL MOON DAY : 2022

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National Moon Day on July 20th commemorates the day man first walked on the moon in 1969. NASA reported the moon landing as being “…the single greatest technological achievement of all time.” National Moon Day :  On July 20, 1969, Apollo 11 carried the first humans to the moon. Six hours after landing on the moon, American Neil Armstrong stepped onto the lunar surface. He spent two and a half hours outside the spacecraft. Buzz Aldrin soon followed, stepping onto the lunar surface. After joining Armstrong, the two men collected 47.5 pounds of lunar material. Their specimens would make the journey back to Earth to be analyzed. In the command module, a third astronaut waited. Pilot, Michael Collins, remained alone in orbit until Armstrong and Aldrin returned. Caught up in the thrill of the a dventure, millions of Americans watched the mission from Earth. Televisions around the world tuned in to the live broadcasts. The astronauts had a worldwide audience. As a result, all witnessed as Arm

भारत की जय : चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी'

हिंदू, जैन, सिख, बौद्ध, क्रिस्ती, मुसलमान पारसीक, यहूदी और ब्राह्मन भारत के सब पुत्र, परस्पर रहो मित्र रखो चित्ते गणना सामान मिलो सब भारत संतान एक तन एक प्राण गाओ भारत का यशोगान

ये रिश्ता एक व्यापार है : भूपेंद्र रावत

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 दर्द है अगर तो बता दो ज़रा ख़ामोशीयों को सुला दो ज़रा अल्फ़ाज़ों को आज बिखर जाने दो एहसासों को अब संवर जाने दो भीतर मेरे भी एक श्मशान है हम दो जिस्म है और एक जान है। आंखों को तुमने पढ़ा ही नही कभी खामोशियों को सुना ही नही कहने को अपना तो पूरा संसार है दुनिया के लिए ये रिश्ता एक व्यापार है।                                                         भूपेंद्र रावत                                                              शिक्षक एवं सामाजिक                                                               कार्यकर्त्ता, नई दिल्ली 

NELSON MANDELA INTERNATIONAL DAY 2022

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"I have cherished the ideal of a democratic and free society in which all persons live together in harmony and with equal opportunities. It is an ideal which I hope to live for and to achieve. But if needs be, it is an ideal for which I am prepared to die". Nelson Mandela Rivonia Trial in South Africa, 1964 Nelson Mandela has many accolades. He’s  an iconic figure that triumphed over South Africa’s apartheid regime. He was a human rights lawyer, a prisoner of conscience, and an international peacemaker. And he was the first democratically elected president of a free South Africa (no biggie). So you see why the United Nations General Assembly would want to celebrate his life. Commemorated on July 18 — Nelson Mandela’s birthday — Nelson Mandela International Day celebrates the idea that each individual has the power to transform the world and the ability to make an impact. So, in honor of his 67 years of public service, the Nelson Mandela Foundation and the U.N. ask that you sp

International Justice Day

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International Justice Day commemorates the historic adoption of the Rome Statute on 17 July 1998, and marks the importance of continuing the fight against impunity and bringing justice for the victims of war crimes, crimes against humanity, and genocide. The day is a reminder of the urgency for all states committed to justice around the world to ensure continued support for the international justice system. It demonstrates the crucial role of civil society members in ensuring that ICC member states live up to their obligations. Coalition members all over the world hold celebrations to embrace this day in solidarity with victims of grave crimes everywhere. "The strengthening of international criminal justice in the last 20 years, and especially the adoption of the Rome Statute and establishment of the new system of international criminal justice and this great Court, will be viewed as a revolutionary advance for peace and the rule of law,” William R. Pace, convenor of the Coalition

कंक्रीट के जंगल : भूपेंद्र रावत

जब युवाओं के द्वारा  कोरे पन्नो पर  लिखा जाएगा,  दर्द से करहाती हुई  पृथ्वी का इतिहास तब बयाँ की जाएगी विकास की ओर अग्रसर, विनाश के आरंभ  होने की कहानी। नग्न होती धरा पर मानव के अत्याचार की कहानियों का भंडार बयाँ करेगा। धीरे धीरे अपना  अस्तित्व खोते हुए  गांव से आधुनिक होते हुए  शहरों तक का सफर तब्दील होते  कंक्रीट के जंगल,  औधोगिक क्रांति में  परिवर्तित होते हुए जंगल की कहानी।

World Youth Skills Day 2022

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In 2014, the United Nations General Assembly declared 15 July as World Youth Skills Day, to celebrate the strategic importance of equipping young people with skills for employment, decent work and entrepreneurship. Since then, World Youth Skills Day has provided a unique opportunity for dialogue between young people, technical and vocational education and training (TVET) institutions, firms, employers’ and workers’ organizations, policy-makers and development partners. World Youth Skills Day 2022 takes place amid concerted efforts towards socio-economic recovery from the COVID-19 pandemic that are interconnected with challenges such as climate change, conflict, persisting poverty, rising inequality, rapid technological change, demographic transition and others. Young women and girls, young persons with disabilities, youth from poorer households, rural communities, indigenous peoples, and minority groups, as well as those who suffer the consequences of violent conflict and political ins

गुरु महिमा : कबीरदास

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संत कबीरदास   गुरु सो ज्ञान जु लीजिये, सीस दीजये दान। बहुतक भोंदू बहि गये, सखि जीव अभिमान॥१॥ व्याख्या: अपने सिर की भेंट देकर गुरु से ज्ञान प्राप्त करो | परन्तु यह सीख न मानकर और तन, धनादि का अभिमान धारण कर कितने ही मूर्ख संसार से बह गये, गुरुपद - पोत में न लगे। गुरु की आज्ञा आवै, गुरु की आज्ञा जाय। कहैं कबीर सो संत हैं, आवागमन नशाय॥२॥ व्याख्या: व्यवहार में भी साधु को गुरु की आज्ञानुसार ही आना - जाना चाहिए | सद् गुरु कहते हैं कि संत वही है जो जन्म - मरण से पार होने के लिए साधना करता है | गुरु पारस को अन्तरो, जानत हैं सब सन्त। वह लोहा कंचन करे, ये करि लये महन्त॥३॥ व्याख्या: गुरु में और पारस - पत्थर में अन्तर है, यह सब सन्त जानते हैं। पारस तो लोहे को सोना ही बनाता है, परन्तु गुरु शिष्य को अपने समान महान बना लेता है। कुमति कीच चेला भरा, गुरु ज्ञान जल होय। जनम - जनम का मोरचा, पल में डारे धोया॥४॥ व्याख्या: कुबुद्धि रूपी कीचड़ से शिष्य भरा है, उसे धोने के लिए गुरु का ज्ञान जल है। जन्म - जन्मान्तरो की बुराई गुरुदेव क्षण ही में नष्ट कर देते हैं। गुरु कुम्हार शिष कुंभ है, गढ़ि - गढ़ि काढ़ै खोट।

International Rock Day 2022

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The Rock or stone is a naturally occurring solid aggregate of one or more minerals or mineraloids. For example, the common rock granite is a combination of the quartz, feldspar and biotite minerals. The Earth’s outer solid layer, the lithosphere, is made of rock. Rocks have been used by mankind throughout history. From the Stone Age, rocks have been used for tools. The minerals and metals found in rocks have been essential to human civilization. What is International Rock Day : International Rock Day has been created so that people all around the world can learn more about rocks. It’s not about rock and roll music; it’s all about the stone variety! After all, rocks play a big role in the environment, and they have been used by humans for many purposes over the years. Three major groups of rocks are defined: igneous, sedimentary, and metamorphic. The scientific study of rocks is called petrology, which is an essential component of geology. At a granular level, rocks are composed of grai

मौत से ठन गई : अटल बिहारी वाजपेयी

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  ठन गई! मौत से ठन गई! जूझने का मेरा इरादा न था, मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था, रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई, यों लगा ज़िन्दगी से बड़ी हो गई। मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं, ज़िन्दगी सिलसिला, आज कल की नहीं। मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूँ, लौटकर आऊँगा, कूच से क्यों डरूँ? तू दबे पाँव, चोरी-छिपे से न आ, सामने वार कर फिर मुझे आज़मा। मौत से बेख़बर, ज़िन्दगी का सफ़र, शाम हर सुरमई, रात बंसी का स्वर। बात ऐसी नहीं कि कोई ग़म ही नहीं, दर्द अपने-पराए कुछ कम भी नहीं। प्यार इतना परायों से मुझको मिला, न अपनों से बाक़ी हैं कोई गिला। हर चुनौती से दो हाथ मैंने किये, आंधियों में जलाए हैं बुझते दिए। आज झकझोरता तेज़ तूफ़ान है, नाव भँवरों की बाँहों में मेहमान है। पार पाने का क़ायम मगर हौसला, देख तेवर तूफ़ाँ का, तेवरी तन गई। मौत से ठन गई। *उपरोक्त छायाचित्र सोशल मीडिया से प्राप्त 

World Population Day 2022

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Background : World Population Day, which seeks to focus attention on the urgency and importance of population issues, was established by the then-Governing Council of the United Nations Development Programme in 1989, an outgrowth of the interest generated by the Day of Five Billion, which was observed on 11 July 1987. By resolution 45/216 of December 1990, the United Nations General Assembly decided to continue observing World Population Day to enhance awareness of population issues, including their relations to the environment and development. The Day was first marked on 11 July 1990 in more than 90 countries. Since then, a number of a number of UNFPA country offices and other organizations and institutions commemorate World Population Day, in partnership with governments and civil society. The UN and Population : The UN Population Division collaborates closely with the agencies, funds, programmes and bodies of the United Nations system in the implementation of the work programme on p

विश्व में खाद्य सुरक्षा और पोषण की स्थिति : संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट

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सांकेतिक छायाचित्र  भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खाद्य उत्पादक देश है। दूध, दाल, चावल, मछली, सब्जी और गेहूं उत्पादन में हम दुनिया में पहले स्थान पर हैं। इसके बावजूद देश की एक बड़ी आबादी कुपोषण का शिकार है। संयुक्त राष्ट्र की ‘द स्टेट ऑफ फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रिशन इन द वर्ल्ड 2022 की रिपोर्ट के अनुसार साल 2019 के कोरोनाकाल के बाद लोगों का भूख से संघर्ष तेजी से बढ़ा है। साल 2021 में दुनिया के 76.8 करोड़ लोग कुपोषण का शिकार पाए गए, इनमें 22.4 करोड़ (29%) भारतीय थे। यह दुनियाभर में कुल कुपोषितों की संख्या के एक चौथाई से भी अधिक है। बता दें कि कई अन्य रिपोर्ट्स में पहले भी ये दावा किया जा चुका है कि कुपोषण भारत की गम्भीरतम समस्याओं में एक है फिर भी इस समस्या पर सबसे कम ध्यान दिया गया है। आज भारत में दुनिया के सबसे अधिक अविकसित (4.66 करोड़) और कमजोर (2.55 करोड़) बच्चे मौजूद हैं। इसकी वजह से देश पर बीमारियों का बोझ बहुत ज्यादा है, हालांकि राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 के आंकड़े बताते है कि देश में कुपोषण की दर घटी है लेकिन न्यूनतम आमदनी वर्ग वाले परिवारों में आज भी आधे से ज्यादा

आरण्यक : परमानंद श्रीवास्तव

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एक दिन हम खो जाएँगे छिप जाएँगे दुनिया से रहने लगेंगे अदृश्य कोटर में पेड़ में गजमुख आसमान की पीठ पर चन्द्रमा डालियाँ सूखी छितराई आसपास सभी पूछेंगे छिपने का राज हम एक दूसरे को देखेंगे और कुछ भी कहने से पहले मुस्कराएँगे फिर भी कुछ भी बताना हमें निरर्थक लगेगा एक दिन हम छोड़ जाएँगे यह घर ये दीवारें या आँगन यह छत यह किताबों का गट्ठर काग़ज़ों का अम्बार बेतरतीब बेसंभाल फिर हम खोजने नहीं आएँगे इनमें दबी हुई चिट्ठियाँ अख़बारों की कतरनें प्रियजनों की पदचाप अपने हुनर की गुमनाम परछाईयाँ कैसी दबी हुई सिसकी निकलती है जब हमें मिल जाता है इसे कबाड़ में मित्र का गुपचुप संकेत कोई अकेला शब्द कूट भाषा में प्रेम खेल के रहस्यमय इशारे कोई फ़ोन नंबर जो काम आता रहा हो बुरे दिनों में एक दिन हम छिप जाएँगे चन्द्रमा की परिधि के आसपास चन्द्रमा दिखेगा मानसरोवर-सा हंस तैर रहे होंगे बत्तखें कर रही होंगी कल्लोल हमारे वजूद से बेख़बर एक साथ कई नीलकंठ सगुन मनाते चुप बैठे होंगे नहाई रोशनाई में फिर हमें अचानक याद आएगा नहीं की हमने कोई वसीयत समय रहते नहीं किया कोई बँटवारा घर-द्वार हाट-दुकान का थोड़ा पछतावा होगा थोड़ा दिलासा