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Autism : Bhupendr Rawat

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The autism spectrum disorders are a heterogenous neuro of meri behavioural syndrome, characterised by difficulties in the development of social relationships and communication skills, limited or severely impaired imagination and extremely repetitive and rigid patterns of behaviour,and marked by the presence of unusually strong narrow interest. There is no single cause for these disorder. This disorder appear during the first three years of life, and know no racial, ethnic,or social boundaries. Family income, life style and educational level do not effect the chance of autism's occurrence. The word 'Autism' was first used by Bleuler, a swiss psychiatrist in1911 to refer to schizophrenia.  Then, over 50 year ago, Leo kanner(1896-1981), published a paper I. 1943 on "early infantile autism'' to this group of children, all of whom appeared to share common characteristics such as withdrawal and ritualistic behaviours. After Kanner, paediatrician Hans Asperger (1906-1

CBSE 10th & 12th Result

हाल ही में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा 10वीं और 12 वीं कक्षा के टर्म -2 की परीक्षा का समापन सफलता पूर्वक किया गया। जहाँ एक ओर कक्षा 10वीं टर्म -2 बोर्ड परीक्षा 24 मई, 2022 को समाप्त हुई, वहीं दूसरी ओर कक्षा 12वीं की परीक्षाएं 15 जून, 2022 को समाप्त हुए। अब परीक्षा में सम्मिलित हुए छात्रों का इंतेज़ार जल्द ही खत्म होने को है क्योंकि जल्द ही केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड(CBSE) 10वीं और 12वीं कक्षा के परिणाम की घोषणा करने वाला है। सूत्रों के अनुसार केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) इस माह के अंत तक या फिर जुलाई के पहले सप्ताह तक 10वीं 12वीं का रिजल्ट जारी कर देगा। रिपोर्ट के अनुसार, सीबीएसई ने कॉपियों का मूल्यांकन पूर कर लिया है तथा छात्रों के अंकों को भी साइट पर अपलोड करने की प्रक्रिया लगभग हो चुकी है। एक बार मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद, बोर्ड टर्म 1 और टर्म 2 के परिणामों को संकलित करेगा और कक्षा 10 और 12 के लिए अंतिम सीबीएसई परिणाम 2022 जारी करेगा। आपको बता दे कि, बोर्ड ने अभी तक टर्म 1 अंक को दिए जाने वाले मार्क्स को साझा नहीं किया है। सीबीएसई की ओर से

शिक्षा कल, आज और कल

                                    स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात शिक्षा के गिरते हुए स्तर में सुधार लाने के लिए तत्कालीन सरकार द्वारा समय समय पर कई प्रयास किये गए। शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करने के लिए कई सारी नीतियां लागू की गई। इन नीतियों को लागू करने का मुख्य उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना था। लेकिन आधुनिकता, वैश्वीकरण, पाश्चात्य सभ्यता के इस युग में भारतीय शिक्षा पद्धति तथा संस्कृति का पतन होता गया। जिसका बुरा असर हमारे आज के समाज पर साफ तौर पर देखा जा सकता है। अपनी मातृभाषा को त्याग कर विदेशी भाषा को भी भारतीय संविधान में जोड़ दिया गया। मैकाले द्वारा बनाई गई वर्तमान शिक्षा प्रणाली ने भारतीय समाज की एकता को नष्ट करने का काम किया। मैकाले की शिक्षा पद्धति का मुख्य उद्देश्य भारत में - संस्कृत, फारसी तथा लोक भाषाओं के वर्चस्व को तोड़कर अंग्रेजी का वर्चस्व कायम करना तथा इसके साथ ही सरकार चलाने के लिए देश के युवा अंग्रेजों को तैयार करना था। मैकाले की इस शिक्षा प्रणाली के जरिए वंशानुगत कर्म के प्रति घृणा पैदा करने और परस्पर विद्वेष फैलाने की भी कोशिश की गई थी। इसके अलावा पश्

बदलते युग में शिक्षा के बदलते उद्देश्य और महत्व

  शिक्षा एक ऐसा माध्यम है जो जीवन को एक नई विचारधारा प्रदान करता है। यदि शिक्षा का उद्देश्य सही दिशा में हो तो आज का युवा मात्र सामाजिक रूप से ही नहीं बल्कि वैचारिक रूप से भी स्वतंत्र और देश का भावी कर्णधार बन सकता है। परंतु आज हमारे समक्ष विडंबना ये है कि भारतीय शिक्षा पद्धति अपने इस उद्देश्य में पूर्ण सफलता प्राप्त नहीं कर सकी है। पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में कई अहम बदलाव देखने को मिले है। ये बदलाव कईं मायनों में अच्छे भी हैं और बुरे भी। आज हम जिस उद्देश्य से बच्चो को शिक्षा दे रहे है उससे पूर्व हमे बच्चो को शिक्षा के महत्व को समझाना जरूरी है जो उन्हें समाज का एक अच्छा नागरिक बनने में मदद करे 'सर्व कुटुम्बकम सर्वस्य' की भावना उनके भीतर जागृत करें। उसके अन्दर यह भावना उत्पन्न की जाये की वह एक समाजिक प्राणी है। उसके समाज के प्रति अपने कुछ कर्तव्य हैं, उसका पूरी इमानदारी से निर्वाह करे तथा अपने से ऊपर उठकर समाज और देश के हित के बारे में विचारे। ज्ञात हो कि ‘शिक्षा का अधिकार कानून’ के अमल में आने से सामाजिक व आर्थिक रूप से पिछड़े तबकों, महिलाओं व बच्चियों तक शिक्षा