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भारत में पिछले 3 वर्षो में कॉन्टेक्टलैस पेमेंट में 6 गुना वृद्धि

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कॉन्टैक्टलेस पेमेंट्स में पिछले तीन वर्षों में भारत में 6 गुना वृद्धि देखी गई और सबसे अधिक अपनाने को त्वरित सेवा रेस्तरां, फार्मेसी, भोजन, किराना जैसे क्षेत्रों में देखा गया। गुरुवार को एक नई रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई।वीजा और वल्र्डलाइन इंडिया के एक श्वेतपत्र के अनुसार, हाल के वर्षों में, विशेष रूप से महामारी के दौरान, कॉन्टैक्टलेस पेमेंट्स में जबरदस्त उछाल देखा गया और कुल फेस-टु-फेस लेनदेन में उनका योगदान 6 गुना से अधिक बढ़ गया, जो दिसंबर 2018 में 2.5 प्रतिशत से कम था और दिसंबर 2021 में 16 प्रतिशत हो गया। इसके अतिरिक्त, ईएमवी चिप कार्डो को अपनाना कॉन्टैक्टलेस पेमेंट्स की वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण रहा है, जो सहायक नियमों द्वारा सहायता प्राप्त है जिसने भारत में कॉन्टैक्टलेस सीमा को 2021 में 5,000 रुपये तक बढ़ा दिया। वीजा में हेड ऑफ प्रोडक्ट्स एंड सॉल्यूशंस, फॉर इंडिया/साउथ एशिया और उपाध्यक्ष, रामकृष्णन गोपालन ने कहा, हमने देखा है कि कॉन्टैक्टलेस विकास के प्रमुख चालक (उपलब्धता, सुविधा, उपयोगिता और सुरक्षा) बड़े पैमाने पर अपनाने में सहायता करना जारी रखेंगे क्योंकि कॉन्टैक्टलेस कार्ड स

वर्ल्ड बैंक (World Bank) ने मौजूदा वित्त वर्ष में भारत की विकास दर कम की, किंतु भारत बना रहेगा शीर्ष पर

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  वर्ल्ड बैंक (World Bank) ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए भारत की आर्थिक ग्रोथ का अनुमान घटाकर 7.5 फीसदी कर दिया है। वर्ल्ड बैंक ने अपने पिछले अनुमान में वित्त वर्ष 2023 में भारत की जीडीपी ग्रोथ (GDP Growth) 8.7 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। हालांकि अब उसने इस अनुमान में 1.2 फीसदी की भारी कटौती की है। World Bank ने मंगलवार को जारी अपनी हालिया ग्लोबल इकोनॉमिक प्रॉस्पेक्ट्स रिपोर्ट में कहा, "वर्ल्ड बैंक ने बढ़ती महंगाई से जुड़ी चुनौतियों, सप्लाई चेन में बाधाएं और भू-राजनैतिक तनाव के असर को देखते हुए भारत की GDP Growth का अनुमान घटाया है।" वित्त वर्ष 2024 में वर्ल्ड बैंक ने भारत की GDP Growth और धीमी होकर 7.1 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। यह इसके 6.8 फीसदी के पिछले अनुमान से 0.3 फीसदी अधिक है। इसके अलावा वित्त वर्ष 2025 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है। यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के परिणाम से वैश्विक आर्थिक मंदी की पृष्ठभूमि में विश्व बैंक ने चालू वित्तवर्ष के लिए भारत की विकास संभावनाओं को घटाकर 7.5 प्रतिशत कर दिया है, लेकिन राष्ट्र अभी भी दुनिया की सबस

ड्रोन क्षेत्र में भारत के बढ़ते कदम

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चित्र : ड्रोन का छायाचित्र* आम आदमी की जिंदगी मड्रोन के उपयोग को बढ़ाने के लिए भारत सरकार पिछले कुछ सालों से अपने ड्रोन पॉलिसी में नरमी ला रही है। अब ड्रोन टेक्नोलॉजी का संबंध सिर्फ डिफेंस सेक्टर से ही नहीं है बल्कि आम आदमी के जन-जीवन में इसका दखल बढ़ता जा रहा है। एग्रीकल्चर, हेल्थकेयर, टूरिज्म और दूसरे क्षेत्र में ड्रोन के लिए व्यापक संभावनाएं हैं। जिसको देखते हुए ड्रोन बनाने वाली कंपनियों में भारी एक्शन देखने को मिल रहा है। ड्रोन टेक्नोलॉजी अब सिर्फ डिफेंस तक सीमित नहीं रह गई है। इस बात की बड़ी संभावना है कि भारत सरकार ई-कॉर्मस कंपनियों के सप्लाई चेन सिस्टम में ड्रोन के उपयोग को मंजूरी दे सकती है । जल्द ही हमें अमेजॉन और फिल्पकॉर्ट जैसी कंपनियां ड्रोन के जरिए अपने ग्राहकों तक सप्लाई करती नजर आ सकती हैं। भारतीय ड्रोन मार्केट में हाल में बढ़े एक्शन को देखते हुए।  Adani Enterprises जैसी कंपनी भी अब ड्रोन जैसे बिजनेस में कदम रखने जा रही है। स्रोत : मनी कंट्रोल * चित्र सोशल मीडिया से प्राप्त 

ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में भारत

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  चित्र : ग्रीन हाइड्रोजन प्रतीक चित्र*  ग्रीन हाइड्रोजन क्या है ?   ग्रीन हाइड्रोज एक तरह की स्वच्छ ऊर्जा है , जो रीन्युबल एनर्जी जैसी सोलर पावर का इस्तेमाल कर पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में बांटने से पैदा होती है। बिजली जब पानी से होकर गुजारी जाती है तो हाइड्रोजन पैदा होती है। ये हाइड्रोजन कई चीजों के लिए ऊर्जा का काम कर सकती है। हाइड्रोजन बनाने में इस्तेमाल होने वाली बिजली रिन्युबल एनर्जी स्त्रोत से आती है। लिहाजा इससे प्रदूषण नहीं होता है। इसीलिए इसे ग्रीन हाइड्रोजन कहते हैं। ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य का ईंधन कहा जाता है और भविष्य में भारत ग्रीन हाइड्रोजन का हब बनेगा। ग्रीन हाइड्रोजन से कार्बन नहीं निकलता , इसका इस्तेमाल कार , बस , हवाई जहाज , जहाज , रॉकेट में किया जा सकता है। यह कम खपत में ज़्यादा चलता है , पेट्रोल डीज़ल से 3 गुना पावरफुल और अच्छा होता है। अब प्रश्न उठता है कि यह अभी तक क्यों इसका इस्तेमाल नहीं होता था? तो दिक्क्त ये है कि ग्रीन हाइड्रोजन का प्रोडक्शन बहुत महंगा है। पेट्रोल की तुलना में इसका रेट 3 गुना है। ग्रीन हाइड्रोजन 350-400 रुपए किलो के हिसाब से बिकता है।

भारत और अमेरिका ने टोक्यो में नए निवेश प्रोत्साहन समझौते पर हस्ताक्षर किए

 भारत और अमेरिका ने सोमवार को जापान के टोक्यो में एक निवेश प्रोत्साहन समझौते (आईआईए) पर हस्ताक्षर किए। यह वर्ष 1997 में भारत सरकार और अमेरिकी सरकार के बीच हस्ताक्षरित निवेश प्रोत्साहन समझौते का स्थान लेगा। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है। इस निवेश प्रोत्साहन समझौते पर भारत के विदेश सचिव विनय क्वात्रा और यू. एस. इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन (डीएफसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्कॉट नाथन ने हस्ताक्षर किए। भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, यह निवेश प्रोत्साहन समझौता वर्ष 1997 में भारत और अमेरिकी सरकार के बीच हस्ताक्षरित निवेश प्रोत्साहन समझौते का स्थान लेगा। पूर्व में, 1997 में निवेश प्रोत्साहन समझौता पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद से महत्वपूर्ण प्रगति हुई हैं, जिसमें डीएफसी नाम की एक नई एजेंसी का गठन भी शामिल है। डीएफसी अमेरिका की एक विकास वित्त एजेंसी है और इसका गठन अमेरिका के हालिया कानून, बिल्ड एक्ट 2018, के अधिनियमन के बाद पूर्ववर्ती विदेशी निजी निवेश निगम (ओपीआईसी) की उत्तराधिकारी एजेंसी के रूप में हुआ है। ऋण, इक्विटी निवेश, निवेश गारंटी, निवेश बीमा या पुनर

भारत का सेमीकंडक्टर मिशन

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भारत का सेमीकंडक्टर मिशन चित्र : सेमी-कंडक्टर * सिलिकॉन से बनी इस बेहद छोटी चिप की अहमियत का अहसास तब होता है , जब दुनिया भर में गाड़ियों का प्रोडक्शन थम जाता है , मोबाइल , लैपटॉप , टैबलेट महंगे हो जाते हैं , डेटा सेंटर डगमगाने लगते हैं , घरेलू अप्लायंस के दाम आसमान छूने लगते हैं , नए एटीएम लगने बंद हो जाते हैं और अस्पतालों में ज़िंदगी बचाने वाली टेस्टिंग मशीनों का आयात रुक जाता है। कोविड के उफान के दिनों में जब इन सेमीकंडक्टर्स या माइक्रोचिप्स की सप्लाई धीमी हो गई थी तो दुनिया भर के लगभग 169 उद्योगों में हड़कंप मच गया था। दिग्गज कंपनियों के अरबों डॉलरों का नुकसान उठाना पड़ा था। चीन , अमेरिका और ताइवान जैसे माइक्रोचिप्स के सबसे बड़े निर्यातक देशों की कंपनियों को भी प्रोडक्शन रोकना पड़ा था। इसी महीने (मई 2022) कार बनाने वाली भारत की सबसे बड़ी कंपनी   मारुती   सुज़ुकी ने बताया कि सेमीकंडक्टर की कमी से अप्रैल महीने में उसे डेढ़ लाख कारें कम बनानी पड़ीं। रुस और यूक्रेन की जंग ने इस संकट को और गहरा कर दिया है, क्योंकि रूस सेमीकंडक्टर माइक्रोचिप्स बनाने में इस्तेमाल होने वाली धातु पैलेडियम क

मल्टी एकसेस एज कम्प्यूटिंग का खर्च 2027 तक 23 बिलियन डॉलर तक पहुँचने का अनुमान

 मल्टी-एक्सेस एज कंप्यूटिंग (एमईसी) पर वैश्विक खर्च 2027 तक 22.7 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है, जो इस साल 8.8 अरब डॉलर था। सोमवार को एक नई रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई है।जुनिपर रिसर्च के अनुसार, 260 प्रतिशत की यह वृद्धि ऑन-प्रिमाइसेस मशीन लर्निग और लो-लेटेंसी 5जी तकनीक द्वारा सक्षम कनेक्टिविटी के लिए बढ़ती आवश्यकताओं से प्रेरित होगी। रिपोर्ट में पाया गया कि एडब्ल्यूएस, आईबीएम और माइक्रोसॉफ्ट (NASDAQ:MSFT) जैसी उन्नत प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ ऑपरेटर साझेदारी एमईसी नोड रोल-आउट के विकास को प्राप्त करने के लिए आवश्यक होगी। 2027 तक 3.4 मिलियन से अधिक एमईसी नोड्स तैनात किए जाएंगे। रिपोर्ट में कहा गया है, 2027 तक 1.6 अरब से अधिक मोबाइल यूजर्स के पास एमईसी नोड्स द्वारा समर्थित सेवाओं तक पहुंच होगी, जो 2022 में केवल 39 करोड़ थी। इसके अलावा, मोबाइल क्लाउड कंप्यूटिंग अगले पांच वर्षों में मोबाइल यूजर्स के बीच अत्यधिक मूल्यवान एमईसी सेवा होने का अनुमान है। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है, प्रसंस्करण शक्ति को एमईसी नोड्स के माध्यम से क्लाउड में स्थानांतरित करने से, यूजर्स को तेज प्रसंस्करण

कोरोना महामारी के बाद पटरी पर लौट रही भारतीय अर्थव्यवस्था : मूडीज

  अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा है कि कोरोना महामारी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट रही है और रूस-यूक्रेन के बीच जारी जंग इसे पटरी से नहीं उतार पायेगी। मूडीज भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर बहुत सकारात्मक है। उसका कहना है कि यूक्रेन में जारी युद्ध भारत की आर्थिक रिकवरी की गति में बाधक नहीं बन पायेगा। मूडीज ने ताजा रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी 8.2 प्रतिशत की दर से वृद्धि करेगी। उसके मुताबिक जी20 देशों में यह सबसे बेहतर वृद्धि दर है। रेंटिंग एजेंसी का कहना है कि बैंकों के लिये अभी आर्थिक माहौल बहुत अनुकूल है। बैंकों का ऋण प्रदर्शन और उनका लाभ बढ़ रहा है। पूंजी और तरलता का स्तर भी स्थिर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग की वजह से भारत में महंगाई दर और ब्याज दर में तेजी आयेगी और आपूर्ति बाधा भी होगी। भारत कृषि प्रधान देश है और यह खाद्यान्नों का बड़ा निर्यातक है। हालांकि, कुछ कृषि उत्पादों के लिये यह आयात पर निर्भर है। मूडीज ने कहा कि खाद्य पदार्थो की कीमतों में तेजी ने प्रत्यक्ष रूप से महंगाई दर को प्रभावित किया है जबकि ईं

भारत सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में शीर्ष स्थान पर बरकरार - संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट

 संयुक्त राष्ट्र, 19 मई (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, चालू वित्तवर्ष के लिए आर्थिक विकास दर 6.4 प्रतिशत रहने के अनुमान के साथ भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था होगा।संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक आर्थिक निगरानी शाखा के प्रमुख हामिद राशिद ने बुधवार को वल्र्ड इकोनॉमिक सिचुएशन एंड प्रॉस्पेक्ट्स (डब्ल्यूईएसपी) की मध्य वर्ष की रिपोर्ट जारी होने पर कहा, हम उम्मीद करते हैं कि अगले साल निकट अवधि में और दो साल भारतीय रिकवरी मजबूत रहेगी। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की वृद्धि वैश्विक विकास दर के विपरीत है जो इस वर्ष और अगले वर्ष 3.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। डब्ल्यूईएसपी के अनुसार, इसका सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), जो अर्थव्यवस्था का समग्र संकेतक है, अगले वित्त वर्ष में 6 प्रतिशत तक नीचे जाने की उम्मीद है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले वित्तवर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था में 8.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो जनवरी के 9 प्रतिशत के पूवार्नुमान से थोड़ा कम है। इसने पिछले वर्ष की तुलना में 2022-23 के लिए कम विकास अनुमानों को उच्च मुद्रास्फीति दबाव और श्रम बाजार की असमान वसूली (वह) निजी खपत

अडानी ग्रुप ने हेल्थकेयर क्षेत्र में रखा कदम

अडानी ग्रुप ने हेल्थकेयर सेक्टर में कदम रखा है। उसने 18 मई (बुधवार) को इसका ऐलान किया और बताया कि हेल्थकेयर से जुड़ी सेवाएं देने के लिए उसने अलग कंपनी बनाई है। इसका नाम अडानी हेल्थ वेंचर्स लिमिटेड (AHVL) है। सब्सिडियरी AHVL हेल्थकेयर से संबंधित बिजनेस करेगी। इसमें मेडिकल और डायगोनिस्टिक फैसिलिटीज की शुरुआत भी शामिल होगी। इसमें कहा गया है कि अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी (WOS) बनाई है। इसका नाम अडानी हेल्थ वेंचर्स है, जिसे 17 मई को बनाया गया। RBI की MPC में कैसे हुआ 0.40% रेपो रेट बढ़ाने का फैसला, कमेटी मेंबर जेआर वर्मा ने खोला राज समूह ने कहा है कि नई कंपनी का अथॉराइज्ड और पेडअप कैपिटल 1,00,000-1,00,000 रुपये होगा। यह मेडिकल और मेडिकल टेस्ट से संबंधित सेवाएं देने के साथ ही हेल्थ एड्स और हेल्थ टेक आधारित सुविधाएं देगी। इसके रिसर्च सेंटर भी होंगे। यह मेडिकल से जुड़ी अन्य तरह की सेवाएं भी देगी। अडानी ग्रुप ने कहा है कि AHVL आने वाले समय में अपना बिजनेस ऑपरेशन शुरू करेगी। इस ऐलान के ठीक एक दिन पहले इस समूह ने अंबुजा सीमेट्स और एसीसी के अधिग्रहण की घोषणा की थ

अडानी समूह की सीमेंट क्षेत्र में एंट्री

ऊर्जा-से-उपभोक्ता समूह अडानी समूह ने स्विस सीमेंट की दिग्गज कंपनी हॉलसिम लिमिटेड के साथ अपने सीमेंट व्यवसाय का अधिग्रहण करने के लिए एक बाध्यकारी समझौता किया है। भारत में, जो अडानी समूह को देश की दूसरी सबसे बड़ी सीमेंट कंपनी के रूप में स्थान देगा। अदानी द्वारा किया गया यह अधिग्रहण न केवल समूह का अब तक का सबसे बड़ा बल्कि बुनियादी ढांचे और सामग्री के क्षेत्र में भारत का अब तक का सबसे बड़ा M&A लेनदेन है। इस सौदे में सीमेंट की बड़ी कंपनियों अंबुजा सीमेंट्स और एसीसी लिमिटेड में होल्सिम की हिस्सेदारी 81,400 करोड़ रुपये या 10.5 बिलियन डॉलर मूल्य के बुनियादी ढांचा समूह अडानी समूह को बेचना शामिल है। होलसिम की अंबुजा सीमेंट्स में 63.19 फीसदी और ACC में 54.53 फीसदी हिस्सेदारी थी। इसके अलावा, रिपोर्टों से पता चलता है कि अडानी समूह सार्वजनिक शेयरधारकों के शेयरों को खरीदने के लिए और 3-3.5 बिलियन डॉलर का उपयोग कर सकता है। अंबुजा सीमेंट्स के लिए ऑफर साइज 385 रुपये प्रति शेयर और अंबुजा सीमेंट्स के लिए 2,300 रुपये है, जो मौजूदा कीमत से लगभग 8-9% प्रीमियम पर है। एक सफल ओपन ऑफर पर, अंबुजा और ACC में अड

Nazara Tech approves bonus issue of shares

नज़ारा  टेक्नोलॉजी कंपनी ने शुक्रवार को एक नियामक फाइलिंग में कहा कि नजरा टेक्नोलॉजीज के बोर्ड ने 1:1 के अनुपात में शेयरों के बोनस इश्यू की सिफारिश की है। निवेशकों द्वारा रखे गए प्रत्येक इक्विटी शेयर के लिए, उसे एक अतिरिक्त शेयर मिलेगा। बोनस इश्यू शेयरधारकों द्वारा अनुमोदन और किसी भी अन्य लागू वैधानिक और नियामक अनुमोदन के अधीन है। शुक्रवार को, NSE पर Nazara Tech के शेयर 14.19% बढ़कर ₹1,253.95 पर बंद हुए।