पांचों विधानसभा सीटों में जीत के अंतर में बलवान पूनिया सबसे आगे

पांचों विधानसभा सीटों में जीत के अंतर में बलवान पूनिया सबसे आगे

हनुमानगढ़। हनुमानगढ़ से कांग्रेस के विनोद कुमार 15522 मतों से विजयी रहे। उन्हें 1 लाख 11 हजार 207 जबकि उनके प्रतिद्वंदी भाजपा प्रत्याशी डॉ. रामप्रताप को 95 हजार 685 वोट मिले। नोहर से कांग्रेस के प्रत्याशी अमित चाचाण 13727 वोट से जीते। चाचाण को 93851 जबकि भाजपा के अभिषेक मटोरिया को 80124 मतों से संतोष करना पड़ा। भादरा से पूर्व में लगाए जा रहे कयासों के अनुसार इस बार माकपा के उ मीदवार बलवान पूनिया दोनों ही राष्ट्रीय पार्टियों भाजपा-कांग्रेस पर शुरू से ही भारी रहे। वे 19784 मतों से विजयी रहे। जिले की पांचों विधानसभा सीटों में जीत के अंतर के मामले में बलवान पूनिया सर्वाधिक मतों से जीतने वाले प्रत्याशी रहे जबकि सबसे कम वोटों से जीत का अंतर पीलीबंगा विधानसभा सीट पर रहा। पीलीबंगा विधानसभा सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी विनोद गोठवाल शुरुआती राउंडों में भाजपा के धर्मंेद्र मोची से काफी आगे चल रहे थे। लेकिन अंतिम के राउंडों में बाजी धर्मंेद्र मोची के पक्ष में पलट गई। लेकिन इसके बाद भी अंतिम राउंड तक दोनों में कड़ी टकर रही। लेकिन अंतिम राउंड में धर्मंेद्र मोची बाजी मारने में सफल रहे। अंतिम व 22वें राउंड में धर्मंेद्र मोची मात्र 375 मत अधिक लेकर कांग्रेस प्रत्याशी विनोद गोठवाल से आगे थे। इसके अलावा संगरिया विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी गुरदीप शाहपीनी करीब छह हजार पांच सौ मतों के अंतर से विजयी रहे। उन्होंने निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस प्रत्याशी शबनम गोदारा को पटखनी दी। पीलीबंगा व संगरिया से कांग्रेस पार्टी ने अपने पुराने प्रत्याशियों पर भरोसा जताते हुए दांव खेला था लेकिन उन्होंने इस बार भी कांग्रेस को निराश ही किया। भादरा में कांग्रेस ने निर्दलीय चुनाव लडक़र विधायक रहे डॉ. सुरेश चौधरी को टिकट दिया था लेकिन वे भी यह मौका भुनाने में असफल रहे और भाजपा प्रत्याशी से भी कम वोट हासिल कर तीसरे स्थान पर रहे। हनुमानगढ़ विधानसभा क्षेत्र की बात की जाए तो यहां से एग्जिट पोल सही साबित हुए और कांग्रेस के विनोद कुमार भाजपा प्रत्याशी पर भारी पड़े। उधर, नोहर में लगातार दो बार विधायक रह चुके अभिषेक मटोरिया को भी इस बार हार का मुंह देखना पड़ा। अभय चौटाला के साले अभिषेक मटोरिया मटोरिया पिछले 2 बार से लगातार विधायक बनते आ रहे थे। इनेलो के दो फाड़ होने पर अभय चौटाला के लिए यह पहला बड़ा सियासी झटका है। नोहर पूर्व सांसद अजय चौटाला की सीट मानी जाती है। उनके इनेलो से अलग होने का मटोरिया की हार पहला बड़ा सियासी असर कहा जा सकता है।

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