हुकमचन्द जी मिश्रा हुए प्रभु चरणों में लीन

हुकमचन्द जी मिश्रा हुए प्रभु चरणों में लीन

– कुंजबिहारी महर्षि, स्वतंत्र पत्रकार, हनुमानगढ़
मरना इसी का नाम जीना इसी का नाम। मरना सभी ने है। मौत निश्चित है और स्थान भी निश्चित है। मरना वहीं जिसका इतिहास बने। सभी के लिए यादगार बन जाए। मैं कोई फिल्म की स्टोरी नहीं लिख रहा हूॅ। ऐसे महान तपस्वी धर्मी कर्मकॉण्डी सच्चाई पर चलने वाले वृयोवृद्ध के बारे में बता रहा हूॅ। जों 103 वर्ष की उम्र में अपना शरीर छोडकर भगवान के चरणों में लीन हो गए। जाने से आधे घण्टे पहले भारतीय संस्कृति के मुताबिक गौदान का संकल्प लिया। लगातार अपनी जीवन काल में पचास से ऊपर गौशालाओं में दलिया व हरा की स्वामणी कर गए। गौड़ ब्राह्मण धर्मशाला में एक लाख रूपये लगाकर शिव मन्दिर व मूर्ति स्थापना करवा दी।
श्री हुकमचन्दम चन्द मिश्रा का जन्म नोहर में हुआ। इनकी धर्मपत्नी परमेश्वरी देवी पंजाब मुलकपुरा की थी। इनके चार पुत्रियां है। कृष्णा, शारदा, सन्तोष, व शशि नाम से जानी जाती है। इन चारों पुत्रियों में से दो पुत्रियों का श्रीगंगानगर व एक का नोहर और एक का सूरतगढ सुसराल है। श्री हुकमचन्द जी मिश्रा के दामाद बद्री प्रसाद कोशिक, शिव प्रकाश शर्मा, सुरेश जी सांखोलिया, व ओम प्रकाश के नाम से जाने जाते हैं। इन सभी के पुत्र अच्छे-अच्छे पदों पर कार्यरत है।
सादा जीवन उच्च विचार:- श्री हुकमचन्द जी मिश्रा का जीवन सादा व साधारण रहा। आपने मोटा खाया और साधारण पहना। अधिकतर आपने अपना जीवन साईकिल चलाकर बिता दिया। आज भी यादगार की साईकिल घर मौजूद है। मिश्रा जी रेलवे से ताराबाबू के पद से सेवानिवृत्त हुये। सन् 2009 में गौड़ धर्मशाला कोर्ट रोड़ पर एक लाख रूपये अपनी पेंशन की सच्ची कमाई में से बचाकर उन्होंने शिव मन्दिर बनवाया। उसमें शिव जी की मूर्ति की स्थापना की। मूर्ति स्थापना पण्डित रतन लाल शास्त्री तथा राजस्थान के विद्ववानों ने प्राण प्रतिष्ठा की। आप शिव भक्त थे।
हो सकता है कि उनको एहसास हो गया हो कि अब मैंने भगवान के चरणों में लीन होना है। सोते उठते बैठते राम नाम गीता के श्लोक बोलने शुरू कर दिए थे। शरीर छोडने के आधे घण्टे पूर्व गौदान करने का संकल्प लिया। पांच माह से शहर की गौशालाओं में दलिया घास की स्वामणि करके जाते – जाते प्रभु का सिमरण करते हुए 10 नवम्बर 2018 शनिवार प्रात: 9 बजे अपना शरीर छोडकर भगवान के चरणों में छीन हो गए। उनका अन्तिम संस्कार उसी दिन जंक्शन की कल्याण भूमि में हुआ। ज्ञात रहे कि श्री हुकमचन्द जी मिश्रा के पुत्र नहीं था। उनके दिनेश कौशिक, राहुल शर्मा, उमेश कौशिक, माया शंकर शर्मा, हरि शंकर शर्मा दोहिते ने मुण्डन करवाकर चिता को अग्नि दी। अन्तिम यात्रा में सैक्टर 12 के गणमान्य लोग रेलवे कर्मचारी मित्र मोहल्लेवासी रिश्तेदारों ने बैण्ड -बाजे के साथ अन्तिम विदाई दी।

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