हनुमानगढ़ मै वोट रडक़ गा? पुल या सडक़ गा…?

हनुमानगढ़ मै वोट रडक़ गा? पुल या सडक़ गा...?

हनुमानगढ़ । कई बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके कांग्रेस के एक स्वर्गीय वरिष्ठ नेता ने लगभग 30 वर्ष पूर्व अपने अनुभव के आधार पर हनुमानगढ़ विधानसभा क्षैत्र की जनता का मानसिक विश्लेषण किया था। उक्त  नेता का कहना था कि आमजन का किसी भी पार्टी या उम्मीदवार विशेष को वोट देने का कोई मेजरमेंट अर्थात पैमाना नहीं होता। उनकी सोच थी कि विकास कार्यों को देखकर कोई वोट नहीं देता, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति अपने निजी संबंधों या राग-द्ववेश को सामने रखकर ही मतदान करता है। बहरहाल विधानसभा चुनाव को लेकर नोमिनेशन फाईल हो चुके हैं। तमाम कांग्रेस-भाजपा सहित तमाम पार्टियों के उम्मीदवार मतदाताओं से सहयोग की गुहार लगा रहे हैं। भाजपा का कहना है कि उनके उम्मीदवार ने नाली, सडक़, पुल, नहर, नाले सहित अनेक विकास कार्य करवाये हैं। अब देखना यह है कि भाजपा प्रत्याशी द्वारा जैसा की दावा किया जा रहा है करवाये गए विकास कार्यों को अधिमान देते हुए आमजन उन्हें विजयी बनाता है या फिर किसी अन्य को। वोट पुल, सडक़ को मिलेंगे या रडक़ को…यह चुनाव परिणाम के बाद पता चलेगा। चुनावी नतीजों से यह भी तय हो जाएगा कि उक्त नेता द्वारा 30 वर्ष पूर्व कही गई यह बात वर्तमान समय में प्रसांगिक है या लोगों की सोच में परिवर्तन आ चुका है?
पीलीबंगा भाजपा में दूर हुए नेताओं के मतभेद?
जिले की पीलीबंगा विधानसभा सीट पर भाजपा के लिए खुशखबर है। नहीं अभी जीत हार का फैसला नहीं हुआ है बल्कि यहां तत्कालीन विधायक द्रोपदी मेघवाल था भाजपा से वर्तमान प्रत्याशी धर्मेन्द्र मोची के बीच सुलह हो गई है। इससे पूर्व टिकट न मिलने के कारण द्रौपदी पूरी तरह खफा थी। उन्होंने निर्दलीय चुनाव लडऩे की घोषणा तक कर डाली थी। मगर अब सुनने में आया है कि पूर्व केन्द्रीय मंत्री तथा सांसद निहालचंद मेघवाल ने दोनों के बीच समझौता करवा दिया है। बहरहाल यदि समझौता सच्चे मन से हुआ है तो निश्चित तौर पर भाजपा लाभ में रहेगी। वैसे भी कहावत है ना यूनियन इज दा स्टैं्रन्थ यानि संगठन में शक्ति।
करणपूर में भाजपा-कांग्रेस ने उतारे परम्परागत उम्मीदवार
प्रदेश में भाजपा के खिलाफ बह रही एंटी इंकम्बैसी की बयार से बड़े-बड़े दिग्गज चिन्तामग्न हैं। कई मौजूदा मंत्री, विधायक चुनाव नहीं लडऩे के बहाने ढूंढ रहे हैं। प्रदेश में कई नेताओं ने परिवारिक मजबूरियों का हवाला देकर कथित रूप से टिकट लेने से इंकार भी किया है। श्रीगंगानगर के करणपूर विधानसभा क्षैत्र से भी कुछ-कुछ इसी प्रकार की सूचनाएं मिल रही हैं। भाजपा ने कई दिन की जदोजहद के बाद वर्तमान विधायक को ही टिकट देने का निर्णय लिया है। इससे पहले पार्टी ने किसी अन्य को देने के प्रयास किये मगर कोई मिला ही नहीं। बहरहाल टक्कर कांग्रेस-भाजपा के उन्हीं परम्परागत उम्मीदवारों के बीच है। देखते हैं ऊंट किस करवट बैठता है?
कांग्रेस की शैली में विरोधाभास
विधानसभा चुनाव को लेकर टिकटों के वितरण में कांग्रेस की कार्यशैली में विरोधाभास देखने को मिल रहा है। कांग्रेस के नेता जहां प्रदेश में सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं। वहीं कई स्थानों पर अभी टिकट भी नहीं दिये गए हैं, जबकि नामांकन पत्र दाखिल करने का मात्र आज का दिन यानि सोमवार ही शेष बचा है। हनुमानगढ़ जिले के नोहर विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस अभी तक टिकट फाईनल नहीं कर पाई है। भाजपा ने जहां पूर्व विधायक अभिषेक मटोरिया को मैदान में उतारा है वहीं कांग्रेस अभी असमंजस में फंसी हुई है। नोहर में कांग्रेस भाजपा से डरी हुई प्रतीत हो रही है। सुनने में आया है कि यहां कांग्रेस निर्दलीय से गठबंधन कर चुनाव लडऩे का मानस बना रही है। बहरहाल कुछ घंटों बाद स्थिति क्लीयर हो जाने की उम्मीद है।

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