प्रथम प्राकृतिक चिकित्सा दिवस स्वस्थ भारत विचार गोष्ठी के रूप में मनाया

प्रथम प्राकृतिक चिकित्सा दिवस स्वस्थ भारत विचार गोष्ठी के रूप में मनाया

हनुमानगढ़। अखिल भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा परिषद् नई दिल्ली एवं आरोग्य निकेतन प्राकृतिक चिकित्सालय हनुमानगढ़ ने भारत सरकार द्वारा धोषित प्रथम प्राकृतिक चिकित्सा दिवस 18 नवम्बर को स्वस्थ भारत विचार गोष्ठी के रूप में मनाया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व उपनिदेशक आयुर्वेद विभाग डॉ.३ जयदेव इन्दोरिया थे। सर्वप्रथम धन्वन्तरी भगवान की पूजा अर्चना से कार्यक्रम शुरू किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आयुर्वेद विभाग के पूर्व उपनिदेशक राजेन्द्र कुमार शर्मा द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया। परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॅा. शिवकुमार शर्मा ने अपने विचार खते हुये कहा कि भारत सरकार ने आयुर्वेद योग सहित आयुष की सभी चिकित्सा पद्यतियों के दिवस धोषित कर रखे है इसी क्रम में प्राकृतिक चिकित्सा दिवस घोषित करने के लिये मंथन चल रहा था, इस संदर्भ में सरकार के ध्यान में यह लाया गया कि प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति महात्मा गांधी की गहरी आस्था थी, उन्होने अपने जीवन में प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति महात्मा गांधी की गहरी आस्था थी उन्होने अपने जीवन में प्राकृतिक चिकित्सा के प्राचार प्रसार में बहुत बड़ा योगदान दिया। उन्होने अपने जीवन को प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति समर्पित करने का संकल्प लेते हुए 18 नवम्बर 1945 को डॉ. दीन शा मेहता के सैनिटोरियम में अपनी अध्यक्षता में आल इण्डिया नेचरक्योर फाउडेशन ट्रस्ट का गठन किया। इस ट्रस्ट का उद्देंश्य प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति समर्पित व्यक्तियों को संगठित कर देश को इस का प्रचारप्रसार करना रखा। डॉ. शिवकुमार शर्मा ने कहा कि गांधी जी ने स्वास्थय के लिए पांच सुत्र बताये है जिनका पालन कर व्यक्ति स्वस्थ रह सकता है जिसमें खुली में टहलना, धूप सेवन, उपवार व मिट्टी पट्टी, रामनाम का जाप या ईश्वर प्रणीधान, एनिया। यह प्राकृतिक चिकित्सा की सम्पूर्ण चिकित्सा है क्योकि इससे पंच महाभूतों की सम अवस्था रहेगी और शरीर में रोग नही होगे। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने भारत सरकार ने आग्रह किया कि वह संसद में विधेयक लाकर केन्द्रिय योग प्राकृतिक चिकित्सा परिषद सीसीवाईएन का गठन कर योग प्राकृतिक चिकित्सा के पठन पाठन पाठयक्रम निर्धारण डिग्री व डिप्लोमा संचालन व चिकित्सा कार्य हेतु चिकित्सकों का विनियमितिकरण कर पंजीकरण करावे इसमें वर्षो से कार्य रह रहे व्यक्ति जिन्होने प्राकृतिक योग को जीवित रखा है व वर्षो का तजुरबा उन्हे पंजीकृत करने का प्रावधान होना चाहिए। जिससे देश में एकरूपता आ सके। डॉ. कृष्ण कुमार पूर्व जिला आयुर्वेद अधिकारी ने अपने विचार रखे इस मौके पर बड़ी संख्या में चिकित्सा प्रेमीयोंने भाग लिया। डॉ. अनिल शर्मा ने आभार जताया। इसी प्रकार आरोग्य निकेतन जयपुर केन्द्र के बाहुवलीनगर निवारू रोड़ में भी प्राकृतिक चिकित्सा दिवस समारोह पूर्वक मनाया। इस मौके पर डॉ. विजय शर्मा, डॉ. नुतन शर्मा, डॉ. सुरेन्द्र कौर, डॉ. अनु शर्मा मिश्रा ने अपने विचार रखे।

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