भाषा मान्यता के लिए सूरतगढ़ में होगा “परमाणु परीक्षण”

भाषा मान्यता के लिए सूरतगढ़ में होगा "परमाणु परीक्षण"
हनुमानगढ़ । विश्वभर में फैले 21 करोड़ राजस्थानियों की मायड़ भाषा राजस्थानी की लगातार राजनैतिक उपेक्षा के चलते प्रदेश भर में सरकार के प्रति भयंकर रोष है।मान्यता आंदोलन पर नये सिरे से गहन विचार विमर्श करने हेतु इक्कीस आवास, हाऊसिंग बोर्ड सूरतगढ़ में रातीजोगै री अेक बंतळ 5 जनवरी शनिवार को रात भर चलेगी।
भाषा प्रेमी हरिमोहन सारस्वत रूंख ने बताया कि इस बैठक में जाति,धर्म,पद,नाम,संगठन आदि को त्याग कर हमारी पहचान केवल राजस्थानी होगी।सबसे बड़े प्रदेश के लोगों को उनकी मातृभाषा से दूर रखना एक बहुत बड़ी साज़िश है।इससे हमारी लोक संस्कृति,कला,संस्कार आदि को बहुत बड़ा नुक़सान हुआ है। कितनी बड़ी विडंबना है कि राजस्थान के बेरोजगार अपने ही प्रदेश में राजस्थानी भाषा के बिना अपने आप को ठगा हुआ महसूस करते हैं जबकि राजस्थान की नौकरियों में बाहरी प्रदेश के अभ्यर्थी अपनी-अपनी मातृभाषा में परीक्षा देकर नौकरियों में सफल हो रहे हैं। सपना प्रदेश होने भाषा की बाड़ लगा रखी है मगर राजस्थान में भारत भर में से कहीं से भी आकर नौकरी कर सकता है यहां तक की बाहरी प्रदेशों के अभ्यर्थियों के लिए न तो कोई भाषा की बाध्यता है और न ही उनके लिए कोई कोटा निर्धारित किया गया है।
मनोज स्वामी ने बताया कि सब राजस्थानी एक होकर नए सिरे से जन जागरण अभियान चलाएंगे जिसमें राजस्थानी बेरोजगारों को जोड़ा जाएगा। मातृभाषा की ताकत बहुत बड़ी होती है।जो कौम अपनी मातृभाषा भूल जाती है वह अपना इतिहास भूलने लगती है और उसका भविष्य खतरे में पड़ जाता है जिससे उस कौम की जड़ें खोखली हो जाती है।
महाराणा प्रताप के वंशज शिवदानसिंह जोलावास ने इस कार्यक्रम को राजस्थानी भाषा का परमाणु परीक्षण कहा है। उन्होंने कहा कि अब आर पार की लड़ाई लड़नी होगी। भाषा का मसला हमारी आन बान और शान से जुड़ा हुआ है। इन सरकारों के भरोसे रह कर हमें कुछ भी नहीं मिला। अब हम राजस्थानी अस्मिता के लिए एक होकर अपनी लड़ाई खुद लड़ेंगे। उन्होंने प्रदेश के नागरिकों से आह्वान किया कि सब कुछ भूल कर केवल यह बात ध्यान रखें कि हम राजस्थानी लोग गुजराती,पंजाबी,बंगाली लोगों के बराबर नहीं खड़े हो सकते क्योंकि हमारी भाषा को संवैधानिक मान्यता नहीं है। राजस्थानी भाषा बिना राजस्थान गूंगा है।यह मलाल ही हम राजस्थानियों को भाषा की मान्यता दिलवाएगा।
कार्यक्रम में प्रदेश भर से मायड़ भाषा प्रेमियों के साथ वरिष्ठ जन भी शिरकत करेंगे।प्रो.कल्याणसिंह शेखावत,बीएल माली अशांत,मनोहरलाल बिश्नोई,रामस्वरूप किसान,डॉ.भरत ओळा,विनोद सारस्वत,अनिल जांदू,गौतम अरोड़ा,भगवती पुरोहित कागद,डॉ.गौरीशंकर प्रजापत सहित सैकड़ों युवा पहुंचेंगे।
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