बुंदेलखंड की लोक चित्र परंपरा : शैलेन्द्र सिंह भदौरिया

बुंदेलखंड में लोक चित्र परंपरा अपनी पृथक पहचान रखती है पर्व त्योहारों पर बुंदेली महिलाएं उनसे संबंधित चित्र रेखांकन बनाकर उनकी पूजा कथा कहती हैं वर्ष पर कोई ना कोई चित्र बनाने की परिपाटी समूचे बुंदेलखंड में मिलती है।
निमाड़ अंचल में लोक चित्रकला की परंपरा सदियों से चली आ रही है घर की दीवारों पर कुछ ना कुछ रेखांकन अवश्य मिलते हैं यही लोग चित्र जो परंपरा से बनते मिटते चले आ रहे हैं पूरे वर्ष पर्व तिथि त्योहारों से संबंधित क्षेत्रों से संबंधित भित्ति चित्रों का रेखांकन पूजा प्रतिष्ठान चर्चा एवं से संबंधित लोकगीत कथाएं वार्ता जल्दी ही रहती है।


हरियाली अमावस्या की जिरोती, नागपंचमी को नाग भित्तिचित्र, कुवार मास में संजाफुली, नवरात्रि में नवरात्र,दशहरे के दिन दशहरा का चित्र शैली, सप्तमी पर हाथ (थापा) दीपावली पर पड़वा गोवर्धन, दिवाली दूज पर भाई दूज का भित्ति चित्र,दीवाली पर ही व्यापारियों द्वारा शुभ मुहूर्त लक्ष्मी पूजा में गणपति और सरस्वती का हल्दी कुमकुम से रेखांकन, देव प्रबोधिनी ग्यारस पर खोपड़ी पूजन।



लोक चित्रकला अंचल के आधार पर विशेषताएं :
1. सुरेती (बुंदेलखंड) : दिवाली में लक्ष्मी पूजा के समय बनाया जाने वाला भित्ति चित्र
2. नौरता/नवरत्न (बुंदेलखंड, निमाड़) : नवरात्रि में मिट्टी गेरू हल्दी से कुंवारी कन्याओं द्वारा बनाया जाने वाला भित्ति चित्र
3. मामूलिया (बुंदेलखंड) : नवरात्रि में गोबर से कुंवारी कन्याओं द्वारा बनाया जाने वाला भित्ति चित्र
4. मोरते (बुंदेलखंड) : विवाह के समय मुख्य दरवाजे पर पुतरी का भित्ति चित्र
5. मोरईला (बुंदेलखंड, बघेलखंड) : दीवारों पर विभिन्न रंगों से मोर के भित्ति चित्र बनाए जाते हैं
6. नाग भित्तिचित्र (संपूर्ण मध्य प्रदेश)  : नाग पंचमी पर दीवारों पर गिरी से नाग नागिन का भित्ति चित्र बनाए जाते हैं
7. अगरोहन (बुंदेलखंड, बघेलखंड) : बधू मंडप में विवाह के अवसर पर बनाए जाते हैं
8. मंडाना (मालवा, निमाड़) : भूमि अलंकरण के रूप में मंडाना को त्योहारों विशेष रूप से दीपावली के समय घर अंगने में बनाया जाता है
9. चित्रावण (मालवा) : विवाह के समय घर की मुख्य दीवार पर बनाया जाने वाला भित्तिचित्र
10. गुदना (संपूर्ण मध्यप्रदेश) : हाथ पैर एवं शरीर के विभिन्न हिस्सों में गुदना गोदवा आया जाता है
11. कोहबर बघेलखंड वैवाहिक अनुष्ठान भित्ति चित्र है
12. छठी चित्र (बघेलखंड)  : शिशु जन्म के छठवें दिन छठी माता का गीत उसे भित्ति चित्र बनाया जाता है
13. निऊरा (बघेलखंड) : भादो की नवमी को सुहागिन महिलाएं पारंपरिक भित्ति चित्र बनाकर पूजा करती हैं
14. जिरोती (निमाड़) : हरियाली अमावस्या को भित्ति चित्र बनाया जाता है
15. सांझाफूली (संपूर्ण मध्यप्रदेश)  कुवार मास में कुंवारी लड़कियों द्वारा बनाया गया भित्ति चित्र
16. थापा (निमाड़ शैली) : सप्तमी पर हाथ का थापा लगाया जाता है
17. खोपड़ी पूजन (निमाड़) : देव प्रबोधिनी ग्यारस को खोपड़ी पूजन किया जाता है
18. कंचाली भरना (निमाड़) : विवाह के अवसर पर दूल्हा-दुल्हन के मस्तक पर कंचाली भरी जाती है
19. ई रत निमाड़ विवाह में कुल देवी का भित्ति चित्र बनाकर पूजा की जाती है
20. पगलिया (निमाड़)  : पहले शिशु जन्म पर शुभ संदेश का रेखांकन किया जाता है
21. तिलंगा (बघेलखंड) : कोयले में तिल्ली के तेल को मिलाकर तिलंगा का भित्ति चित्र बनाया जाता है

शैलेन्द्र सिंह भदौरिया
शिक्षक
भिंड, मध्य प्रदेश 



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