डॉ. विधान पाठक की स्मृति में "21वीं सदी में अफ्रीका के प्रति भारत की नीति" वक्तव्य का आयोजन


दिनांक 30 जुलाई, 2022 को इंडिया अफ्रीका नॉलेज फोरम (IAKF) के तत्वाधान में डॉ. विधान पाठक की स्मृति में "21वीं सदी में अफ्रीका के प्रति भारत की नीति" का आयोजन किया गया | IAKF एक अकादमिक चर्चा समूह है, जिसका उद्देश्य भारत और अफ्रीका में विचारों और अनुभवों के आपसी आदान-प्रदान को बढ़ाना है एवं बदलते वैश्विक परिवेश में दो क्षेत्रों के बीच लोगों के संबंधों को गहरा करना है, IAKF पिछले दो वर्षों से निरंतर अन्य संबंधित संस्थानों के साथ मिलकर एवं स्वतंत्र रूप से कई शैक्षणिक आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किए हैं।

 इसी कड़ी में IAKF के आधार स्तम्भ डॉ. विधान पाठक स्मृति में प्रस्तुत कार्यक्रम का आयोजन किया गया| जिसकी अध्यक्षता प्रोफेसर गजेंद्र सिंह, अध्यक्ष, अफ्रीकी अध्ययन विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय के माध्यम से की गई। उन्होंने सर्वप्रथम अपनें साथी प्राध्यापक डॉ. विधान पाठक को याद किया एवं अफ्रीकी अध्ययन विभाग समेत उनकी विभिन्न उपलब्धियों को विस्तृत रूप से देश विदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से जुड़े छात्रों एवं शिक्षकों के मध्य से रखा | उसके उपरांत उन्होंने इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रोफेसर हर्ष वी पंत, उपाध्यक्ष, अध्ययन और विदेश नीति, ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन का परिचय करवाया। तत्पश्चात प्रो. हर्ष वी. पंत ने डॉ विधान पाठक की स्मृति में आयोजित प्रथम व्याख्यान में "21वीं सदी में अफ्रीका के प्रति भारत की नीति" पर अपने विचार को सभी के समक्ष रखे | उन्होंने बताया की भारत और अफ़्रीकी देशों के मध्य में राजैनतिक, आर्थिक एवं सामजिक सम्बन्ध प्राचीन समय से ही मधुर रहें है और बदलते वैश्विक परिवेश में दोनों क्षेत्रों के बीच में संबधो में और प्रगाड़ता आई है, जिसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा यूगांडा की संसद 10 भारत-अफ्रीका संबंधों के लिए 10 मार्गदर्शक सिद्धांत का भी जिक्र किया और बातया की कैसे हिंद महागर के बढते भू-राजनैतिक महत्व के कारण चीन समेत अन्य देशों के बढते वर्चस्व को रोकने के लिए दोनों के संबंधों में निकटता आना जरुरी है साथ ही उन्होंने आतंकवाद, समुद्री डाकू एवं अन्य समस्याओं से कैसे भारत और अफ़्रीकी देश मिल कर निपट सकते है उसका भी अपने वक्तव्य में विस्तृत रूप से जिक्र किया।

    अंत में इस कार्यक्रम के संयोजक श्री लोकेश राठौर के माध्यम से धन्यवाद ज्ञापन कर कार्यक्रम की समाप्ति की गई | 

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