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Showing posts from July, 2022

मुंशी प्रेमचंद जयंती : 31 जुलाई, 2022

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जब भी ​हिंदी लेखकों के बारे में बात की जाती है तो मुंशी प्रेमचंद का नाम सबसे पहले लिया जाता है। मुंशी प्रेमचंद हिंदी साहित्य के सबसे सर्वश्रेष्ठ कहानीकारों में से एक थे। उन्होंने हमेशा अपनी कहानियों से समाज में फैली रुढ़िवादिता को खत्म करने की कोशिश की है। उनका जन्म 31 जुलाई 1880 में वाराणसी के लमही गांव में हुआ था। आज उन्हीं सर्वश्रेष्ठ लेखक की जयंती है। प्रेमचंद का साहित्यिक योगदान : प्रेमचंद रचना संसार बहुत ही विस्तृत और महत्वपूर्ण है। इनकी कृतियां हर कालखंड में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करती रहेंगी। प्रेमचंद हिंदी साहित्य के एक ऐसे लेखक बनकर उभरे, जिन्होंने अपनी कलम और सोच की बदौलत प्रचलित कहानियों की धारा को ही बदल कर रख दिया था। उन्होंने समकालीन एवं पूर्व के लेखकों को कहानी रचना कर्म की एक नई धारा से परिचित करवाया था। उस कालखंड में यह बात प्रचलित थी कि हिंदी कहानियों में तिलस्म और ऐय्यारी का ही बोलबाला था । प्रेमचंद ने इस तिलस्म और ऐय्यारी को ध्वस्त कर रख दिया था। समाज में क्या घटनाएं घट रही हैं समाज किस ओर जा रहा है। समाज में रहने वाले लोगों की स्थिति क्या है। पुरुषों स्त्रियों क

डॉ. विधान पाठक की स्मृति में "21वीं सदी में अफ्रीका के प्रति भारत की नीति" वक्तव्य का आयोजन

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दिनांक 30 जुलाई, 2022 को इंडिया अफ्रीका नॉलेज फोरम (IAKF) के तत्वाधान में डॉ. विधान पाठक की स्मृति में "21वीं सदी में अफ्रीका के प्रति भारत की नीति" का आयोजन किया गया | IAKF एक अकादमिक चर्चा समूह है, जिसका उद्देश्य भारत और अफ्रीका में विचारों और अनुभवों के आपसी आदान-प्रदान को बढ़ाना है एवं बदलते वैश्विक परिवेश में दो क्षेत्रों के बीच लोगों के संबंधों को गहरा करना है, IAKF पिछले दो वर्षों से निरंतर अन्य संबंधित संस्थानों के साथ मिलकर एवं स्वतंत्र रूप से कई शैक्षणिक आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किए हैं।  इसी कड़ी में IAKF के आधार स्तम्भ डॉ. विधान पाठक स्मृति में प्रस्तुत कार्यक्रम का आयोजन किया गया| जिसकी अध्यक्षता प्रोफेसर गजेंद्र सिंह , अध्यक्ष, अफ्रीकी अध्ययन विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय के माध्यम से की गई। उन्होंने सर्वप्रथम अपनें साथी प्राध्यापक डॉ. विधान पाठक को याद किया एवं अफ्रीकी अध्ययन विभाग समेत उनकी विभिन्न उपलब्धियों को विस्तृत रूप से देश विदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से जुड़े छात्रों एवं शिक्षकों के मध्य से रखा | उसके उपरांत उन्होंने इस कार्यक्रम के मुख्य व

International Friendship Day : 2022

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 International Friendship Day 2022 Most countries celebrate the International Friendship Day on July 30. The day was first proposed in 1958 by an international civil organisation – World Friendship Crusade, which campaigns to foster a culture of peace by promoting friendship. The General Assembly of United Nations formally adopted the International Day of Friendship in 2011. Friends are companions who support and guide you through tough times. While we enjoy moments with our friends throughout the year, International Friendship Day is a great way to thank our friends and celebrate their contribution in our lives. Friendship is one of the most beautiful relationships among humans. A friend is someone who is always present in needy times. Some countries, including India celebrate Friendship Day on the first Sunday of every August. This year, the day will be celebrated on August 7, 2022. History of the Day :  Known as a celebration of the beautiful bond of friendship, the International Fr

नीरव प्रतिध्वनि : डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी

 हॉल तालियों से गूँज उठा, सर्कस में निशानेबाज की बन्दूक से निकली पहली ही गोली ने सामने टंगे खिलौनों में से एक खिलौना बतख को उड़ा दिया था। अब उसने दूसरे निशाने की तरफ इशारा कर उसकी तरफ बन्दूक उठाई। तभी एक जोकर उसके और निशानों के बीच सीना तान कर खड़ा हो गया।   निशानेबाज उसे देख कर तिरस्कारपूर्वक बोला, "हट जा।" जोकर ने नहीं की मुद्रा में सिर हिला दिया। निशानेबाज ने क्रोध दर्शाते हुए बन्दूक उठाई और जोकर की टोपी उड़ा दी। लेकिन जोकर बिना डरे अपनी जेब में से एक सेव निकाल कर अपने सिर पर रख कर बोला “मेरा सिर खाली नहीं रहेगा।” निशानेबाज ने अगली गोली से वह सेव भी उड़ा दिया और पूछा, "सामने से हट क्यों नहीं रहा है?" जोकर ने उत्तर दिया, "क्योंकि... मैं तुझसे बड़ा निशानेबाज हूँ।" "कैसे?" निशानेबाज ने चौंक कर पूछा तो हॉल में दर्शक भी उत्सुकतावश चुप हो गए। “इसकी वजह से...” कहकर जोकर ने अपनी कमीज़ के अंदर हाथ डाला और एक छोटी सी थाली निकाल कर दिखाई। यह देख निशानेबाज जोर-जोर से हँसने लगा। लेकिन जोकर उस थाली को दर्शकों को दिखा कर बोला, “मेरा निशाना देखना चाहते हो... देखो..

ए.पी.जे. अब्दुल कलाम : भारत मंथन

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INTERNATIONAL TIGER DAY : 29 JULY

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Global Tiger Day is celebrated every year on July 29th as a way to raise awareness about this magnificent but endangered big cat. The day was founded in 2010, when the 13 tiger range countries came together to create Tx2 – the global goal to double the number of wild tigers by the year 2022.  2016 marks the halfway point of this ambitious goal and this year has been one of the most united and exciting Global Tiger Days yet. WWF offices, organisations, celebrities, government officials, families, friends and individuals around the world came together in support of the #ThumbsUpForTigers campaign – showing the tiger range countries that there is worldwide support for tiger conservation efforts and the Tx2 goal. INDIA : India is home to over half of the world’s wild tigers – an estimated 2,226. Global Tiger Day was observed across all WWF tiger landscapes with much fervor and enthusiasm. The teams organized week-long celebrations to build awareness on tiger conservation and develop a stro

बुंदेलखंड की लोक चित्र परंपरा : शैलेन्द्र सिंह भदौरिया

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बुंदेलखंड में लोक चित्र परंपरा अपनी पृथक पहचान रखती है पर्व त्योहारों पर बुंदेली महिलाएं उनसे संबंधित चित्र रेखांकन बनाकर उनकी पूजा कथा कहती हैं वर्ष पर कोई ना कोई चित्र बनाने की परिपाटी समूचे बुंदेलखंड में मिलती है। निमाड़ अंचल में लोक चित्रकला की परंपरा सदियों से चली आ रही है घर की दीवारों पर कुछ ना कुछ रेखांकन अवश्य मिलते हैं यही लोग चित्र जो परंपरा से बनते मिटते चले आ रहे हैं पूरे वर्ष पर्व तिथि त्योहारों से संबंधित क्षेत्रों से संबंधित भित्ति चित्रों का रेखांकन पूजा प्रतिष्ठान चर्चा एवं से संबंधित लोकगीत कथाएं वार्ता जल्दी ही रहती है। हरियाली अमावस्या की जिरोती, नागपंचमी को नाग भित्तिचित्र, कुवार मास में संजाफुली, नवरात्रि में नवरात्र,दशहरे के दिन दशहरा का चित्र शैली, सप्तमी पर हाथ (थापा) दीपावली पर पड़वा गोवर्धन, दिवाली दूज पर भाई दूज का भित्ति चित्र,दीवाली पर ही व्यापारियों द्वारा शुभ मुहूर्त लक्ष्मी पूजा में गणपति और सरस्वती का हल्दी कुमकुम से रेखांकन, देव प्रबोधिनी ग्यारस पर खोपड़ी पूजन। लोक चित्रकला अंचल के आधार पर विशेषताएं : 1. सुरेती (बुंदेलखंड) : दिवाली में लक्

अस्पृश्य प्रकृति : डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी

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 "जय श्री देव..." घर के मुख्य दरवाज़े के बाहर से एक स्त्री स्वर गूंजा। जाना-पहचाना स्वर सुन कर अंदर बैठी 12-13 वर्षीय लड़की एक बार तो कुर्सी से उछल कर खड़ीं हुई, लेकिन कुछ सोचती हुई फिर बैठ गयी। कुछ क्षणों बाद वही स्वर फिर गूंजा। अब वह लड़की उठकर बाहर चली गयी। लड़की को देखकर बाहर खड़ी महिला ने पुनः किन्तु पहले से धीमे स्वर में “जय श्री देव” बोलते हुए देवता की मूर्ती रखे एक बर्तन को उसके सामने कर दिया। बर्तन देखते ही वह लड़की एक कदम पीछे हट गयी और बोली, "आंटीजी आज नहीं दूँगी, आप अगले हफ्ते आना।" "क्यूँ बिटिया?" महिला ने यह बात सुनकर आश्चर्य से पूछा। उस लड़की ने कहा "कुछ नहीं आंटी..." उसी समय उस लड़की की माँ भी बाहर आ गयी। माँ ने उस महिला के बर्तन में एक सिक्का डाला, उसमें रखी मूर्ती को हाथ जोड़े और फिर फुसफुसाते हुए बोली, "बिटिया पीरियड्स में है, इसलिए भगवान के कार्यों में स्पर्श नहीं करना है।" वह महिला चौंकी और उसने भी धीमे स्वर में कहा, "हम और हमारी जिंदगी, सब कुछ तो इसी का बनाया हुआ है... फिर भी?" "क्या करें, रीति-रिवाज हैं...

Believe Your Self : Bharat Manthan

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Kargil Vijay Diwas : 26 July

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Kargil Vijay Diwas is celebrated every year on July 26 since the year 1999, to mark India’s victory over Pakistan in the Kargil conflict. This year nation is celebrating the 23 years of victory in the Kargil war. It was in 1999 that a high altitude mountain war broke out along the peaks of Kargil near the Line of Control, the de-facto border that divides Kashmir between the two nations. History of Kargil War: The Kargil War was fought between May-July of 1999 in the Kargil district of Jammu and Kashmir along the Line of Control (LoC) in which India got the victory. The Kargil war was fought for more than 60 days, ended on 26 July. On this date in 1999 Pakistan army taking advantage of the melting snow and betraying the bilateral understanding of both the nations (that the post would remain unattended during the winter season) took command of the high outposts of India. Pakistan army refused the claims that its soldiers were involved in the war and claimed that they were the rebels from

जीवन-संघर्ष : भारत मंथन

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देवभूमि उत्तराखंड घुमूला (कुमाउनी कविता) : भूपेंद्र रावत

 हिट मेरी दगड़ा  मैं तुझको ले जुला पहाड़ बाज़ार मैं  तुझको घुमूला तू हिट मेरी दगड़ा पहाड़ का रंग ढंग  तुझको सीखुला हिट रे भुला मेर दगिड़ तुझको, देवभूमि उत्तराखंड घुमूला अल्मोड़ा चितई ग्वेल  तुझको दिखुला  कसार देवी मंदिर इतिहास तुझको बतुला  हिट मेर दगड़ा  देवभूमि उत्तराखंड घुमूला पहाड़ों की रानी मसूरी  तुझको ली जुला  अल्मोड़ा की बाल मिठाई भी मैं खिलुला हिट मेर दगड़ा भुला देवभूमि उत्तराखंड घुमूला

आयकर दिवस (Income Tax Day)

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केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (Central Board of Direct Taxes (CBDT) ने 24 जुलाई 2021 को 161वां आयकर दिवस (जिसे Income Tax Day भी कहा जाता है) मनाया। भारत में, आयकर दिवस हर साल 24 जुलाई को मनाया जाता है, क्योंकि सर जेम्स विल्सन (Sir James Wilson) द्वारा भारत में पहली बार 24 जुलाई 1980 को आयकर पेश किया गया। इस कर का उद्देश्य 1857 में ब्रिटिश शासन के खिलाफ स्वतंत्रता के पहले युद्ध के दौरान ब्रिटिश शासन को हुए नुकसान की भरपाई करना था। 24 जुलाई को पहली बार 2010 में आयकर दिवस के रूप में मनाया गया था। आयकर दिवस का इतिहास: भारत में 24 जुलाई, 1860 में सबसे पहले एक शुल्क के तौर पर आयकर की शुरुआत की गई थी। इसलिए विभाग ने इसी दिन (24 जुलाई) को आयकर दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया। वर्ष 2010 में पहला आयकर दिवस मनाया गया। इस अवसर भारत की राजधानी में एक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम का उद्‍घाटन वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने किया था। आयकर विभाग प्रथम आयकर दिवस को यादगार बनाने के लिए डाक टिकट और सिक्के भी जारी किये थे। आयकर दिवस के अवसर पर विभाग अधिकारियों को भी सम्मानित किया जाता है

शहर घूम ऊला (कुमाउनी कविता) : भूपेंद्र रावत

ऐ गयऊ पहाड़ बटिक दुइ पैस कमाना शहर, हिट रे भुला मेर दगिड़ पैस कमाना पहाड़म बिताई बचपन, उती छोड़ ऊला हिट रे भुला मेर दगिड़  शहरों घूम ऊला। नी छू कुछ काम धंध, रोटी कैस खूला  हिट रे भुला मेर दगिड़  ओ ओ ओ हिट रे भुला मेर दगिड़  शहर घूम ऊला  पहाड़ की मजबूरी हेगी  ओ हां हां हां पहाड़ की मज़बूरी हेगी कैसे खुश हुला हिट रे भुला मेर दगिड़  शहर घूम ऊला  पहाड़ की ठंड हवा, पानी उती छोड़ ऊला दुई पैस कमान लिजी शहर घूम ऊला

Post Office Deposit Scheme

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इन दिनों महंगाई बढ़ती जा रही है। ऐसे में सैलरीड और मीडियम क्लास के लिए बड़े निवेश कभी आसान नहीं होते हैं। इन हालात में छोटी रकम के साथ निवेश करना एक अच्छा ऑप्शन हो सकते हैं। पोस्ट ऑफिस की रिकरिंग डिपॉजिट यानी आरडी स्कीम एक बेहतर ऑप्शन हो सकती है। इसे आवर्ती जमा के नाम से भी जाना जाता है। आरडी स्कीम (RD Scheme) की खास बात यह है कि इसमें आपको हर महीने निवेश करते हैं। इसे पोस्ट ऑफिस आरडी अकाउंट (Post Office Recurring Deposit Account) भी कहा जाता है। इसके जरिये आप हर महीने 10,000 रुपये यानी रोज 333 रुपये के निवेश के साथ 10 साल मे एक बड़ा फंड तैयार कर सकते हैं। पोस्ट ऑफिस की आरडी में 10 साल से ज्यादा उम्र का कोई भी बच्चा या वयस्क खाता खुलवा सकता है। इस अकाउंट में सिर्फ 100 रुपये के छोटे से अमाउंट से निवेश शुरू कर सकते हैं। यह योजना सरकार की गारंटी योजना के साथ आती है। अधिकतम निवेश की कोई लिमिट नहीं है आप इसमें आप 10 रुपये के मल्टीपल में कितना भी पैसा डाल सकते हैं।  फिलहाल आरडी स्कीम पर सालाना 5.8 फीसदी ब्याज मिल रहा है, यह दर जुलाई, 2022 से लागू है। केंद्र सरकार अपनी सभी छोटी बचत योजनाओं की

दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँ : अकबर इलाहाबादी

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दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार1 नहीं हूँ बाज़ार से गुज़रा हूँ, ख़रीददार नहीं हूँ ज़िन्दा हूँ मगर ज़ीस्त2 की लज़्ज़त3 नहीं बाक़ी हर चंद कि हूँ होश में, होशियार नहीं हूँ इस ख़ाना-ए-हस्त4 से गुज़र जाऊँगा बेलौस5 साया हूँ फ़क़्त6, नक़्श7 बेदीवार नहीं हूँ अफ़सुर्दा8 हूँ इबारत9 से, दवा की नहीं हाजित10 गम़ का मुझे ये जो’फ़11 है, बीमार नहीं हूँ वो गुल12 हूँ ख़िज़ां13 ने जिसे बरबाद किया है उलझूँ किसी दामन से मैं वो ख़ार14 नहीं हूँ यारब मुझे महफ़ूज़15 रख उस बुत के सितम से मैं उस की इनायत16 का तलबगार17 नहीं हूँ अफ़सुर्दगी-ओ-जौफ़18 की कुछ हद नहीं “अकबर” क़ाफ़िर19 के मुक़ाबिल में भी दींदार20 नहीं हूँ शब्दार्थ: 1. तलबगार= इच्छुक, चाहने वाला; 2. ज़ीस्त= जीवन; 3. लज़्ज़त= स्वाद; 4. ख़ाना-ए-हस्त= अस्तित्व का घर; 5. बेलौस= लांछन के बिना; 6. फ़क़्त= केवल; 7. नक़्श= चिन्ह, चित्र; 8. अफ़सुर्दा= निराश; 9. इबारत= शब्द, लेख; 10. हाजित(हाजत)= आवश्यकता; 11. जो’फ़(ज़ौफ़)= कमजोरी, क्षीणता; 12. गुल= फूल; 13. ख़िज़ां= पतझड़; 14. ख़ार= कांटा; 15. महफ़ूज़= सुरक्षित; 16. इनायत= कृपा; 17. तलबगार= इच्छुक; 18. अफ़सुर्दगी

NATIONAL MOON DAY : 2022

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National Moon Day on July 20th commemorates the day man first walked on the moon in 1969. NASA reported the moon landing as being “…the single greatest technological achievement of all time.” National Moon Day :  On July 20, 1969, Apollo 11 carried the first humans to the moon. Six hours after landing on the moon, American Neil Armstrong stepped onto the lunar surface. He spent two and a half hours outside the spacecraft. Buzz Aldrin soon followed, stepping onto the lunar surface. After joining Armstrong, the two men collected 47.5 pounds of lunar material. Their specimens would make the journey back to Earth to be analyzed. In the command module, a third astronaut waited. Pilot, Michael Collins, remained alone in orbit until Armstrong and Aldrin returned. Caught up in the thrill of the a dventure, millions of Americans watched the mission from Earth. Televisions around the world tuned in to the live broadcasts. The astronauts had a worldwide audience. As a result, all witnessed as Arm

भारत की जय : चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी'

हिंदू, जैन, सिख, बौद्ध, क्रिस्ती, मुसलमान पारसीक, यहूदी और ब्राह्मन भारत के सब पुत्र, परस्पर रहो मित्र रखो चित्ते गणना सामान मिलो सब भारत संतान एक तन एक प्राण गाओ भारत का यशोगान

ये रिश्ता एक व्यापार है : भूपेंद्र रावत

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 दर्द है अगर तो बता दो ज़रा ख़ामोशीयों को सुला दो ज़रा अल्फ़ाज़ों को आज बिखर जाने दो एहसासों को अब संवर जाने दो भीतर मेरे भी एक श्मशान है हम दो जिस्म है और एक जान है। आंखों को तुमने पढ़ा ही नही कभी खामोशियों को सुना ही नही कहने को अपना तो पूरा संसार है दुनिया के लिए ये रिश्ता एक व्यापार है।                                                         भूपेंद्र रावत                                                              शिक्षक एवं सामाजिक                                                               कार्यकर्त्ता, नई दिल्ली 

NELSON MANDELA INTERNATIONAL DAY 2022

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"I have cherished the ideal of a democratic and free society in which all persons live together in harmony and with equal opportunities. It is an ideal which I hope to live for and to achieve. But if needs be, it is an ideal for which I am prepared to die". Nelson Mandela Rivonia Trial in South Africa, 1964 Nelson Mandela has many accolades. He’s  an iconic figure that triumphed over South Africa’s apartheid regime. He was a human rights lawyer, a prisoner of conscience, and an international peacemaker. And he was the first democratically elected president of a free South Africa (no biggie). So you see why the United Nations General Assembly would want to celebrate his life. Commemorated on July 18 — Nelson Mandela’s birthday — Nelson Mandela International Day celebrates the idea that each individual has the power to transform the world and the ability to make an impact. So, in honor of his 67 years of public service, the Nelson Mandela Foundation and the U.N. ask that you sp

International Justice Day

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International Justice Day commemorates the historic adoption of the Rome Statute on 17 July 1998, and marks the importance of continuing the fight against impunity and bringing justice for the victims of war crimes, crimes against humanity, and genocide. The day is a reminder of the urgency for all states committed to justice around the world to ensure continued support for the international justice system. It demonstrates the crucial role of civil society members in ensuring that ICC member states live up to their obligations. Coalition members all over the world hold celebrations to embrace this day in solidarity with victims of grave crimes everywhere. "The strengthening of international criminal justice in the last 20 years, and especially the adoption of the Rome Statute and establishment of the new system of international criminal justice and this great Court, will be viewed as a revolutionary advance for peace and the rule of law,” William R. Pace, convenor of the Coalition

कंक्रीट के जंगल : भूपेंद्र रावत

जब युवाओं के द्वारा  कोरे पन्नो पर  लिखा जाएगा,  दर्द से करहाती हुई  पृथ्वी का इतिहास तब बयाँ की जाएगी विकास की ओर अग्रसर, विनाश के आरंभ  होने की कहानी। नग्न होती धरा पर मानव के अत्याचार की कहानियों का भंडार बयाँ करेगा। धीरे धीरे अपना  अस्तित्व खोते हुए  गांव से आधुनिक होते हुए  शहरों तक का सफर तब्दील होते  कंक्रीट के जंगल,  औधोगिक क्रांति में  परिवर्तित होते हुए जंगल की कहानी।

World Youth Skills Day 2022

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In 2014, the United Nations General Assembly declared 15 July as World Youth Skills Day, to celebrate the strategic importance of equipping young people with skills for employment, decent work and entrepreneurship. Since then, World Youth Skills Day has provided a unique opportunity for dialogue between young people, technical and vocational education and training (TVET) institutions, firms, employers’ and workers’ organizations, policy-makers and development partners. World Youth Skills Day 2022 takes place amid concerted efforts towards socio-economic recovery from the COVID-19 pandemic that are interconnected with challenges such as climate change, conflict, persisting poverty, rising inequality, rapid technological change, demographic transition and others. Young women and girls, young persons with disabilities, youth from poorer households, rural communities, indigenous peoples, and minority groups, as well as those who suffer the consequences of violent conflict and political ins

गुरु महिमा : कबीरदास

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संत कबीरदास   गुरु सो ज्ञान जु लीजिये, सीस दीजये दान। बहुतक भोंदू बहि गये, सखि जीव अभिमान॥१॥ व्याख्या: अपने सिर की भेंट देकर गुरु से ज्ञान प्राप्त करो | परन्तु यह सीख न मानकर और तन, धनादि का अभिमान धारण कर कितने ही मूर्ख संसार से बह गये, गुरुपद - पोत में न लगे। गुरु की आज्ञा आवै, गुरु की आज्ञा जाय। कहैं कबीर सो संत हैं, आवागमन नशाय॥२॥ व्याख्या: व्यवहार में भी साधु को गुरु की आज्ञानुसार ही आना - जाना चाहिए | सद् गुरु कहते हैं कि संत वही है जो जन्म - मरण से पार होने के लिए साधना करता है | गुरु पारस को अन्तरो, जानत हैं सब सन्त। वह लोहा कंचन करे, ये करि लये महन्त॥३॥ व्याख्या: गुरु में और पारस - पत्थर में अन्तर है, यह सब सन्त जानते हैं। पारस तो लोहे को सोना ही बनाता है, परन्तु गुरु शिष्य को अपने समान महान बना लेता है। कुमति कीच चेला भरा, गुरु ज्ञान जल होय। जनम - जनम का मोरचा, पल में डारे धोया॥४॥ व्याख्या: कुबुद्धि रूपी कीचड़ से शिष्य भरा है, उसे धोने के लिए गुरु का ज्ञान जल है। जन्म - जन्मान्तरो की बुराई गुरुदेव क्षण ही में नष्ट कर देते हैं। गुरु कुम्हार शिष कुंभ है, गढ़ि - गढ़ि काढ़ै खोट।