International Day against Drug Abuse and Illicit Trafficking

 

व्यसन (नशा) शब्द अंग्रेजी के ‘एडिक्ट‘ शब्द का रूपान्तरण है, जिससे शारीरिक निर्भरता की स्थिति प्रकट होती है। व्यसन का अभिप्राय शरीर संचालन के लिए मादक पदार्थ का नियमित प्रयोग करना है अन्यथा शरीर के संचालन में बाधा उत्पन्न होती है। व्यसन न केवल एक विचलित व्यवहार है अपितु एक गम्भीर सामाजिक समस्या भी है। तनावों, विशदों, चिन्ताओं एवं कुण्ठाओं से छुटकारा पाने के लिए व्यक्ति कई बार असामाजिक मार्ग अपनाकर नशों की और बढ़ने लगता है, जो कि उसे मात्र कुछ समय के लिए उसे आराम देते हैं।

किसी प्रकार का व्यसन (नशा) न केवल व्यक्ति की कार्यक्षमता को कम करता है अपितु यह समाज और राष्ट्र दोनों के लिए हानिकारक है। स्वास्थ्य की दृष्टि से देखा जाए तो व्यसन (नशा) विभिन्न प्रकार की बिमारियों को आमंत्रण देता है। नशीले पदार्थ के पयोग से व्यक्ति मानसिक एवं शारीरिक तौर पर पूर्णतया आश्रित हो जाता है, जिसके हानिकारक प्रभाव केवल व्यक्ति ही नहीं अपितु उसके परिवार और समाज पर भी पड़ते हैं।

अंतराष्ट्रीय स्तर पर इस प्रकार नशे के बढते हुए हालातों तथा समाज पर इसके दुष्परिणामों और दुप्रभावों को मद्देनजर रखते हुए, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 7 दिसंबर 1987 को, 26 जून को नशीली दवाओं के दुरुपयोग से अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को मुक्त करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कार्रवाई और सहयोग को मजबूत करने के अपने दृढ़ संकल्प के रूप में 42/112 प्रस्ताव को अपनाकर हर साल 26 जून को नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध व्यापार के विरोध का अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया था। तब से प्रत्येक वर्ष 26 जून को अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस (International Day Against Drug Abuse and Illicit Trafficking)।


क्यों मनाया जाता है "अंतर्राष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस" : 

इस वर्ष 26 जून 2022 को "अंतर्राष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस" के लिए एक नई थीम “न्याय के लिए स्वास्थ्य, स्वास्थ्य के लिए न्याय’ (हेल्थ फॉर जस्टिस एंड जस्टिस फॉर हेल्थ)“। रखी गयी है।

हर वर्ष 26 जून को "अंतर्राष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस" मनाने का मुख्य उद्देश्य नशे के प्रयोग से व्यक्ति के स्वस्थ्य तथा समाज में होने वाले कुप्रभाव से लोगों को जागरूक करना तथा नशे की बुरी आदत से छुटकारा दिलाना के अतिरिक्त उन्हें नशे से होने वाले दुष्प्रभाव से बचाना इत्यादि हैं।


मुत्यु दर :- 

अमेरिकी केंद्रों की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि अमेरिका में २००१ के दौरान 75,754 मृत्यु शारब के उच्च और मध्यम सेवन के कारण हुई थी। कम उपभोग का असर कुछ फायदेमंद है, इसलिए 59,180 मौतों के लिए शराब को जिम्मेदार ठहराया गया था।

ब्रिटेन में, प्रतिवर्ष 33,000 मौतों के लिए भारी मात्रा में सेवन को जिम्मेदार ठहराया जाता है।

स्वीडन में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि 29 % से 44 % "अप्राकृतिक" मौत (जो बीमारी के कारण नहीं हुए थे) शराब से संबंधित थे; मौतों के कारणों में आत्महत्या, चक्कर आना, यातायात दुर्घटना, दम घुटना, नशा और हत्या शामिल हैं।

एक वैश्विक अध्ययन से पता चला कि वैश्विक स्तर पर सभी कैंसर में से 3.6 % अल्कोहल सेवन के कारण होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप 3.5% वैश्विक कैंसर मौतें होती हैं। 

ब्रिटेन के एक अध्ययन में पाया गया कि ब्रिटेन में 6 % कैंसर से होने वाली मौतों का कारण शराब है, जो कि प्रतिवर्ष 9,000 से अधिक है।

यूएनओडीसी के वर्ष 2015 के आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया भर में करीब 23.4 करोड़ लोग ड्रग्स का इस्तेमाल करते हैं. हर साल ड्रग्स के कारण करीब 2 लाख लोग जान गंवा बैठते हैं. जुलाई 2016 में राज्य सभा में पेश किए गए राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो (एनसीबी) के नशे संबंधी आंकड़ों के अनुसार भारत में हर दिन ड्रग्स या शराब के चलते 10 मौतें या आत्महत्याएं होती हैं. इनमें से केवल एक मौत पंजाब में होती है. इन आंकड़ों के मुताबिक ड्रग्स की लत से जुड़ी सबसे ज्यादा आत्महत्याएं महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और केरल में होती हैं.

डब्ल्यूएचओ(WHO) की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 25 करोड़ से अधिक लोग सिगरेट, बीड़ी, हुक्का, गुटखा, पान मसाला किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं। पूरे विश्व में धूम्रपान करने वाले लोगों की 12% आबादी भारत में है, तंबाकू से संबंधित बीमारियों से लगभग 50 लाख लोग प्रतिवर्ष मारे जाते हैं । जिनमें करीब डेढ़ लाख महिलाएं हैं ।भारत पूरे विश्व में दूसरे नंबर पर है, जहां सबसे अधिक धूम्रपान किया जाता है । हर दिन लगभग 2500 लोगों की धूम्रपान से मौत होती है । एक सिगरेट पीने से जिंदगी के 11 मिनट कम हो जाते हैं । स्वास्थ्य मंत्रालय के जारी बयान के अनुसार शहरी क्षेत्रों में 6 प्रतिशत महिलाएं एवं ग्रामीण क्षेत्रों में 12 प्रतिशत महिलाएं तंबाकू से बने उत्पादों का सेवन करती हैं। महिलाओं में अधिक धूम्रपान का कारण स्तन कैंसर के रूप में भी देखा जा रहा है।

नशे को खत्म करने तथा समाज को नशा मुक्त करने के लिए समय समय पर राष्ट्रीय तथा अंतराष्ट्रीय संस्थाओ द्वारा कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए है जिससे कि समाज मे इससे होने वाले दुष्प्रभाव तथा इस बुराई को जड़ से खत्म किया जा सके और राष्ट्र प्रगति तथा विकास की राह पर अग्रसर हो सके। इसी प्रकार एक जिम्मेदार सामाजिक नागरिक की भूमिका अदा करते हुए हम सब भी अपने अपने स्तर पर जितना संभव हो सके प्रयास करें और आर्थिक, सामाजिक, तथा शारिरिक रूप से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से पड़ने वाले इसके कुप्रभावों के बारे में अपने आस पास लोगों को जागरूक करें।

जिससे की हम एक स्वस्थ समाज का निर्माण कर सके।


                                                    - भूपेंद्र रावत


संदर्भ : 

  1. https://hi.m.wikipedia.org/wikih
  2. ttps://www.google.com/amp/s/www.aajtak.in/amp/india/news/story/drugs-market-increased
  3. उपरोक्त छायाचित्र सोशल मीडिया से प्राप्त 

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