एक साथ : भूपेंद्र रावत

 यूं ही मुक़म्मल नही होती, बातों से ज़िंदगी

एक साए की तरह साथ निभाना होता है

वायदों से नजाने क्यों मुकर जाते है, लोग

उम्रभर रूह को, जिस्म का भार उठाना होता है।


                                            - भूपेंद्र रावत


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