गुलज़ार की ग़ज़ले


गुलाज़र जी का छायाचित्र*

ग़ुलज़ार नाम से प्रसिद्ध 'सम्पूर्ण सिंह कालरा' हिन्दी फिल्मों के प्रसिद्ध गीतकार हैं। इसके अतिरिक्त वे एक कवि, पटकथा लेखक, फ़िल्म निर्देशक नाटककार तथा प्रसिद्ध शायर हैं।  आप "त्रिवेणी" छंद के सृजक और हिन्दी फ़िल्म उद्योग के जाने-माने गीतकार हैं। गुलजार को हिंदी सिनेमा के लिए कई प्रसिद्ध अवार्ड्स से भी नवाजा जा चुका है। उन्हें 2004 में भारत के सर्वोच्च सम्मान पद्म भूषण से भी नवाजा जा चूका है।  इसके अलावा उन्हें 2009 में डैनी बॉयल निर्देशित फिल्म 'स्लम्डाग मिलियनेयर' में उनके द्वारा लिखे गीत जय हो के लिये उन्हे सर्वश्रेष्ठ गीत का ऑस्कर पुरस्कार पुरस्कार मिल चुका है।  इसी गीत के लिये उन्हे ग्रैमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। प्रस्तुत है गुलज़ार जी की कुछ चुनिंदा नज़में :


दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
जैसे एहसान उतारता है कोई

आईना देख के तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई

पक गया है शज़र पे फल शायद
फिर से पत्थर उछालता है कोई

फिर नज़र में लहू के छींटे हैं
तुम को शायद मुग़ालता है कोई

देर से गूँजतें हैं सन्नाटे
जैसे हम को पुकारता है कोई
हवा गुज़र गयी पत्ते थे कुछ हिले भी नहीं
वो मेरे शहर में आये भी और मिले भी नहीं


दर्द हल्का है साँस भारी है
जिए जाने की रस्म जारी है


आप के बाद हर घड़ी हम ने
आप के साथ ही गुज़ारी है


रात को चाँदनी तो ओढ़ा दो
दिन की चादर अभी उतारी है


शाख़ पर कोई क़हक़हा तो खिले
कैसी चुप सी चमन पे तारी है


कल का हर वाक़िआ तुम्हारा था
आज की दास्ताँ हमारी है
क्या बताएं कि जां गयी कैसे
फिर से दोहराएं वो घड़ी कैसे


किसने रास्ते में चांद रखा था
मुझको ठोकर लगी कैसे


वक़्त पे पांव कब रखा हमने
ज़िंदगी मुंह के बल गिरी कैसे


आंख तो भर आयी थी पानी से
तेरी तस्वीर जल गयी कैसे


हम तो अब याद भी नहीं करते
आप को हिचकी लग गई कैसे


ये कैसा रिश्ता हुआ इश्क में वफ़ा का भला
तमाम उम्र में दो चार छ: गिले भी नहीं


इस उम्र में भी कोई अच्छा लगता है लेकिन
दुआ-सलाम के मासूम सिलसिले भी नहीं
उधड़ी सी किसी फ़िल्म का एक सीन थी बारिश
इस बार मिली मुझसे तो ग़मगीन थी बारिश


कुछ लोगों ने रंग लूट लिए शहर में इस के
जंगल से जो निकली थी वो रंगीन थी बारिश


रोई है किसी छत पे, अकेले ही में घुटकर
उतरी जो लबों पर तो वो नमकीन थी बारिश


ख़ामोशी थी और खिड़की पे इक रात रखी थी
बस एक सिसकती हुई तस्कीन थी बारिश






*छायाचित्र सोशल मीडिया से प्राप्त 



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