जिंदगी : भूपेंद्र रावत

 हर दर्द के लिए दवा नहीं दी जाती

हर दफ़ा जीने की वजह नहीं दी जाती

जी ली जाती है जिंदगी अपने ही असूलों से

दूसरों के सहारे ज़िंदगी की निबाह नहीं दी जाती।


ज़िंदगी मे काफिले और भी है तेरे सिवा

जीने की और भी वज़ह है तेरे सिवा

एक तू ही नही जो दवा दे हर ज़ख्म की

दर्द-ए-पैहम अभी और भी है तेरे सिवा


जब कोई रिश्ता निभाना मुश्किल हो 

अपनो पर हक़ जताना मुश्किल हो

निकाल लो बाहर खुद को रिश्तों के उस बोझ से

जहाँ रिश्तों का वज़ूद बचाना मुश्किल हो


जब जिरह किसी रिश्ते की बुनियाद बन जाती है

अपनो के बीच ही खुद का वज़ूद खोती जाती है

टूट जाती है नेह की डोर उस वक़्त

रिश्ते की डोर जब नाज़ुक हो जाती है


ज़िंदगी दर्द में, जीना अक़्सर सीखा ही देती है

ज़ख्म हो गहरा, दर्द को पीना सीखा ही देती है

नही की जाती यां किसी से मरहम की उम्मीद

अक्सर ख़ामोशी लबों को सीना सीखा ही देती है

                                                   - भूपेंद्र रावत 

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