कहां बसा भगवान : भूपेंद्र रावत

 हाड़ मास के पुतले हम सब 

फ़क़त यही हमारी पहचान है

इंसानियत सबकी मर गयी है

बताओ कौन बचा इंसान है।


नाम मात्र धरा पर जीवित है,सब

भीतर दफ़न एक श्मशान है।

इंसानियत जिसकी अभी शेष है

फ़क़त वही बचा एक इंसान है।


पूजे मंदिर, मस्जिद, गिरजा

भटक रहा इंसान है।

नकारे अपना अपनो को ही

बता कहां बसा भगवान है।

        

                                   - भूपेंद्र रावत 

Comments

Popular posts from this blog

भारतीय साहित्य में विभाजन का दर्द

वीरांगना नांगेली

संयुक्त राष्ट्र की भाषाओं में हिंदी शामिल

'वैवाहिक बलात्कार'(Marital Rape) - सच या सिर्फ सोच? : दीपाली

महिला सशक्तिकरण या समाज का सच : दीपाली

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की मशहूर शायरी

ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में भारत

बाबूजी की साईकिल : अभिनव

Blood & Faith - Matthew Carr

सत्य वचन (उत्तराखंड की लोक कथा) : भूपेंद्र रावत