माँ को हर क्षण मुस्कुराते देखा है : भूपेंद्र रावत

 माँ को हर क्षण मुस्कुराते देखा है

ज़िन्दगी की किताब में 

मुश्किल पन्नो को भी 

हँसी से पलटाते हुए देखा है ।

बुढापे की सीढ़ी में 

दरख्तों को साया बन

साथ निभाते हुए देखा है ।

फ़लक से टूटते तारों को 

अक्सर जगमगाते हुए देखा है।


                               - भूपेंद्र रावत

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