21 वीं सदी के लिए 21 सबक़ : युवाल नोआ हरारी



अप्रासंगिक सूचना के सैलाब में डूबी इस दुनिया में स्पष्टता एक बड़ी शक्ति है। सिद्धान्ततः मनुष्यता के भविष्य की बहस में कोई भी व्यक्ति हिस्सा ले सकता है, लेकिन एक स्पष्ट दृष्टि बनाए रखना बहुत मुश्किल है। अक्सर तो इस ओर हमारा ध्यान तक नहीं जाता कि कोई बहस चल रही है, या यह कि निर्णायक महत्त्व के सवाल क्या है। जाँच - पड़ताल की विलासिता पालना हम में से अरबों लोगों के वश की बात नहीं है, क्योंकि इससे कहीं ज्यादा जरूरी काम है, जो हमें करने पड़ते है हमें अपने काम पर जाना होता है, बच्चों का पालन - पोषण करना होता है, या अपने बूढ़े माँ - बाप की देखभाल करनी होती है। बदकिस्मती से, इतिहास कोई छूट नहीं देता। अगर मनुष्यता के भविष्य का फ़ैसला आपकी गैरमौजूदगी में होता है, क्योंकि आप अपने बच्चों का पेट भरने और तन ढँकने के काम में बेहद व्यस्त है, तो इसका मतलब यह नहीं कि आप और वे इसके नतीजों से बचे रहेंगे। यह बहुत ही अन्याय की बात है, लेकिन कौन कहता है कि इतिहास न्यायपूर्ण होता है ? एक इतिहासकार के रूप में मैं लोगों को भोजन और वस्त्र मुहैया नहीं करा सकता, लेकिन मैं थोड़ी - बहुत सुस्पष्टता की पेशकश करने की कोशिश ज़रूर कर सकता हूँ और इस तरह एक ऐसी वैश्विक परिस्थिति रचने में मदद कर सकता हूँ, जिसमें सभी के लिए समान अवसर हो। अगर इससे मुट्ठीभर अतिरिक्त लोग भी हमारी प्रजाति के भविष्य की बहस में शामिल होने में सक्षम हो पाते हैं, तो मैं अपने कर्तव्य को पूरा हुआ समझँगा। मेरी पहली पुस्तक सेपियन्स ने मानव के अतीत का सर्वेक्षण करते हुए इस बात का परीक्षण किया था कि एक निहायत ही मामूली सा वानर किस तरह पृथ्वी ग्रह का शासक बन गया। मेरी दूसरी पुस्तक होमो डेयस जीवन के सुदीर्घ भविष्य की पड़ताल करती हुई इस सम्भावना पर विचार करती है कि किस तरह मनुष्य अन्ततः देवता बन सकता है, और बुद्धि तथा चेतना की नियति अन्तिम रूप से क्या हो सकती है।

यह पुस्तक 21 सबक़ विस्मित करने वाले इस युग में इस बात की खोज है कि मनुष्य होने का क्या अर्थ है?

पुस्तक नाम : 21 वीं सदी के लिए 21 सबक़

लेखक : युवाल नोआ हरारी

अनुवाद : मदन सोनी

प्रकाशक : मंजुल  पब्लिशिंग हाउस, भोपाल

प्रकाशन वर्ष : हिंदी संस्करण 2020

Comments

Popular posts from this blog

भारतीय साहित्य में विभाजन का दर्द

वीरांगना नांगेली

संयुक्त राष्ट्र की भाषाओं में हिंदी शामिल

'वैवाहिक बलात्कार'(Marital Rape) - सच या सिर्फ सोच? : दीपाली

महिला सशक्तिकरण या समाज का सच : दीपाली

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की मशहूर शायरी

ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में भारत

बाबूजी की साईकिल : अभिनव

Blood & Faith - Matthew Carr

सत्य वचन (उत्तराखंड की लोक कथा) : भूपेंद्र रावत