अनमोल राय : असम की लोक कथा
जयंत फुकन नामक एक व्यक्ति सिलचर के पास एक गाँव में निवास करता था । वह एक संपन्न परिवार में जन्मा था । जमीन-जायदाद, रुपये-पैसे की उसे कोई कमी न थी और वह सुखमय जीवन व्यतीत कर रहा था । एक दिन वह पड़ोस के गाँव में रहने वाले अपने चाचा के पोते के विवाह में सम्मिलित होने गया । विवाह उपरांत वह कुछ दिन गाँव देखने वहीं रुक गया । एक दिन घूमते-घूमते वह वहाँ के हाट-बाज़ार पहुँचा. तरह-तरह के सामानों से सजी दुकानों को देख वह बहुत प्रसन्न हुआ । दिन भर वह हाट में घूमता रहा । शाम होने को आई, तो देखा कि दुकानदार दुकान बंद कर घर लौट रहे हैं । वह भी लौटने को हुआ । लेकिन तभी उसकी दृष्टि एक दुकान पर पड़ी, जो उस समय भी खुली हुई थी । उसने दुकानदार से पूछा, “क्यों भाई, घर नहीं जाना? दुकान बंद नहीं करोगे?” “मेरी कोई बिक्री नहीं हुई भाई, कैसे घर जाऊं?” दुकानदार बोला । “क्या बेचते हो?” जयंत ने पूछा । “मैं सलाह बेचता हूँ । ” उस व्यक्ति ने उत्तर दिया । यह सुनकर जयंत आश्चर्यचकित रह गया और पूछा, “क्या कहा? सलाह? कैसी सलाह?” “मूल्य चुकाओगे, तभी सलाह मिलेगी, बिना मूल्य के कुछ भी नहीं मिलता । ” दुकानदार बोला । जयंत